बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 के प्रश्न-पत्र लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के पटना जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। ये संपत्तियां कौशिक कुमार कर के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं।
ईडी ने यह जांच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), पटना की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 420, 467 और 468 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर में परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक करने से जुड़े टेलीग्राम यूआरएल, मोबाइल नंबर और बैंक खातों का भी उल्लेख था।
ईडी के मुताबिक, 22 अगस्त 2024 को दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि ‘ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड’ के मालिक कौशिक कुमार कर ने साजिश के तहत अपनी दूसरी कंपनी ‘कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल किया।
जांच में सामने आया कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास न तो छपाई का कोई पूर्व अनुभव था और न ही उसकी अपनी प्रिंटिंग प्रेस थी। इसके बावजूद सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल, बिहार ने उसे प्रश्नपत्र छापने का ठेका दिया। ईडी का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की भूमिका छिपाई गई, जिसे पहले परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों में संलिप्तता के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
ईडी के अनुसार, कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स ने अनुबंध के तहत प्रश्नपत्र छापने का काम हासिल करने के बाद इसे ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को सौंप दिया। इस दौरान परीक्षा के प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए जा रहे थे, तभी कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर उन्हें लीक कर दिया गया। पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इससे बिहार सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ और परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
5.9 करोड़ के अग्रिम भुगतान में से 2.01 करोड़ रुपये का पता नहीं चला
ईडी की जांच में पता चला कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को प्रश्नपत्र छापने के लिए 5.9 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था। इसमें से केवल एक हिस्सा ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया, जबकि शेष 2.01 करोड़ रुपये कथित तौर पर कई फर्जी कंपनियों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर भेज दिए गए। बाद में ये कंपनियां गायब हो गईं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अपराध से हासिल रकम को कोलकाता स्थित ऐसी कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से छिपाया गया, जिनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। फर्जी लेन-देन के जरिए रकम को अलग-अलग शेल कंपनियों में भेजा गया और बाद में नकदी में बदल दिया गया, ताकि उसके स्रोत और लेन-देन का पता न चल सके।
ईडी का कहना है कि अपराध से हासिल रकम का आगे पता नहीं चल पाने के कारण 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। ये संपत्तियां एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं।
मामले में ईडी की जांच जारी है। एजेंसी अब अपराध से हासिल अन्य रकम का पता लगाने और कथित मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल दूसरे आरोपियों तथा कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है।




