Friday, 30 October 2026
राष्ट्रीय

केरल सरकार ने खत्म की लोक केरल सभा, प्रवासियों के लिए नई व्यवस्था की तैयारी

तिरुवनंतपुरम, 29 अक्टूबर। दुनिया भर में रहने वाले प्रवासी मलयालियों की समस्याओं, कल्याण और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए गठित लोक केरल सभा को समाप्त करने के बाद केरल सरकार अब इसके विकल्प के रूप में नई व्यवस्था तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि पुराना मंच अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल नहीं रहा। सरकार अब अधिक प्रभावी व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है।

विधानसभा में प्रवासी कल्याण योजनाओं में देरी और लोक केरल सभा को समाप्त करने के फैसले पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के जरिए प्रवासी भारतीय अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा सकेंगे, राज्य के विकास में योगदान दे सकेंगे और अपने निवेश को उत्पादक क्षेत्रों में लगा सकेंगे।

सरकार ने प्रवासी समुदाय और उनके संगठनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के लिए ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल गठित करने का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति इस बात पर विचार कर रही है कि प्रवासी मलयालियों के लिए कौन-सी संस्थागत व्यवस्था सबसे उपयुक्त होगी।

2018 में हुई थी लोक केरल सभा की शुरुआत

लोक केरल सभा की शुरुआत वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बसे मलयाली समुदाय के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना था, ताकि प्रवास, निवेश, कल्याण और अनिवासी केरलवासियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सके।

उस समय विपक्ष में रही कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने इस मंच की बैठकों का बहिष्कार किया था। विपक्ष का आरोप था कि लोक केरल सभा पर अनावश्यक खर्च किया जा रहा है और इसकी सिफारिशों को लागू नहीं किया जाता। अब सरकार ने इस मंच को उसके मौजूदा स्वरूप में समाप्त करने का फैसला किया है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सरकार के सामने अब यह साबित करने की चुनौती होगी कि नई व्यवस्था प्रवासियों को वास्तविक लाभ पहुंचाएगी और केवल पुराने मंच का नाम बदलकर नया मंच नहीं बनेगी।

प्रवासी कल्याण बोर्ड पर बढ़ा आर्थिक दबाव

विधानसभा में चर्चा के दौरान प्रवासी कल्याण बोर्ड की आर्थिक स्थिति का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020-21 में बोर्ड के सदस्यों की संख्या 17,771 थी, जो अब बढ़कर 1,00,495 हो गई है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड की औसत मासिक आय करीब 16.7 करोड़ रुपये है, जबकि उसका मासिक खर्च लगभग 35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले पांच महीनों में राज्य सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए 32 करोड़ रुपये दिए हैं, लेकिन अभी भी भुगतान बकाया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, बोर्ड के पास 700 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान बकाया है। उन्होंने प्रवासी संगठनों से इस राशि की वसूली में सहयोग करने की अपील की।

बीमा दावों और हवाई किराये की भी चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोरका की बीमा योजनाओं के तहत दावों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे इन योजनाओं का नवीनीकरण करना मुश्किल हो रहा है। सरकार इस समस्या के समाधान के लिए नई व्यवस्था तैयार कर रही है।

उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के लिए हवाई यात्रा के बढ़ते खर्च पर भी चिंता जताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार कई बार केंद्र से हवाई किरायों को नियंत्रित करने का आग्रह कर चुकी है। बढ़ते किराये के कारण प्रवासी श्रमिकों की बचत पर असर पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार जल्द ही लोक केरल सभा के विकल्प के रूप में नई व्यवस्था लाएगी। साथ ही प्रवासी कल्याण योजनाओं, निवेश और प्रवासी समुदाय से जुड़े अन्य मुद्दों पर काम जारी रहेगा।

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