कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की आशंकाओं के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,151.04 के मुकाबले 48.65 अंक की बढ़त के साथ 74,199.69 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 27.75 अंक यानी 0.12 प्रतिशत चढ़कर 22,964.50 पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी 22,936.75 पर बंद हुआ था।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,357.55 और निफ्टी ने 22,994.70 का उच्चतम स्तर छुआ। हालांकि, इन उच्चतम स्तरों के आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।
शेयरों की बात करें तो निफ्टी 50 में Trent के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा IndiGo, Sun Pharma, Infosys, Eternal और TCS के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। दूसरी ओर Coal India, BEL और Shriram Finance के शेयरों पर दबाव रहा।
व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार कारोबार में आईटी और फार्मा शेयरों में मजबूती रही, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, एफएमसीजी, ऑटो, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर दबाव में रहे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर बाजार की नजर
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधियां भी अहम बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 943 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,924 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
विश्लेषकों के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सहारा मिल रहा है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के कारण बड़ी तेजी की राह आसान नहीं दिख रही है।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ी चिंता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में तेजी देखने को मिली। हालांकि, अलग-अलग कारोबारी समय पर तेल के भाव में अंतर रहा।
अमेरिकी टेक कंपनियों के नतीजों का असर
वैश्विक बाजारों में अमेरिकी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ते खर्च को लेकर निवेशकों की चिंताएं भी बनी हुई हैं। इसके चलते एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने के बाद भी अमेरिकी बाजारों में कमजोरी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक आर्थिक हालात से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को बाजार में सावधानी बरतने और कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।




