नई दिल्ली: राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की बात सुनने और उनसे संवाद स्थापित करने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया तथा पूरे घटनाक्रम पर उचित जवाबदेही नहीं दिखाई।
खड़गे ने कहा कि 20 जुलाई की घटना के बाद सरकार को तुरंत संसद और देश के सामने विस्तृत जानकारी रखनी चाहिए थी। उनके अनुसार, संबंधित मंत्री की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और छात्रों की चिंताओं को सीधे संबोधित करने के बजाय अन्य माध्यमों से प्रतिक्रिया दी गई।
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन के इस्तेमाल और अन्य पुलिस कार्रवाई के आदेश किस स्तर पर दिए गए। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे और दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ तथा रैपिड एक्शन फोर्स ने किसके निर्देश पर कार्रवाई की।
खड़गे ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश और असम समेत कई राज्यों में भी छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई हुई, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई पर उसे कोई पछतावा है या नहीं।
उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक की समस्या समाप्त नहीं होगी। सरकार को ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे भविष्य में परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की संभावना न्यूनतम हो।
खड़गे ने दावा किया कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों को लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार और अन्य पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि बैरिकेडिंग, मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के बंद होने तथा इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण छात्रों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी परेशानी हुई। उनके अनुसार, आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।




