पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल (Gardanibagh Protest Site) पर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। यहां 15 सूत्री मांगों को लेकर ‘शिक्षा सत्याग्रह 2.0’ के नाम से अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन चल रहा है। आंदोलन में आज अमन कुमार पांचवें दिन और जाह्नवी रॉय तीसरे दिन आमरण अनशन पर हैं। दोनों ने बिहार की शिक्षा और भर्ती परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाई है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना, लंबित भर्ती परीक्षाओं को जल्द कराना, TRE-4 में एकल परीक्षा और ‘One Candidate, One Result’ व्यवस्था लागू करना, 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द करना, बिहार में 85 प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू करना और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक व अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जैसी मांगें शामिल हैं।
दी आज़ादी से बातचीत में अनशन पर बैठी जाह्नवी रॉय ने इन मांगों के साथ-साथ धरना स्थल पर महिला अनशनकारियों की सुरक्षा, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का सवाल भी उठाया। वहीं अमन कुमार ने कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से मांगों पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है। आंदोलनकारियों ने 25 अगस्त को गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च का आह्वान किया है।
गर्दनीबाग धरना स्थल पर दिनभर जुटते हैं छात्र
गर्दनीबाग का धरना स्थल इन दिनों कई छात्र आंदोलनों का केंद्र बना हुआ है। दिन में बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी यहां जुटते हैं। कई छात्र शाम तक और देर रात तक धरना स्थल पर रहते हैं। आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ रात में भी लोगों का सहयोग बढ़ रहा है।
स्थल पर चल रहे शिक्षा सत्याग्रह 2.0 में शामिल छात्र 15 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं इसी धरना स्थल पर PhD Research Scholars का अलग आंदोलन भी जारी है। शोधार्थी 17 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और 22 अगस्त को अपनी मांगों को लेकर राजभवन मार्च कर रहे हैं।
अमन कुमार और जाह्नवी रॉय क्यों आमरण अनशन पर हैं?
अमन कुमार पांच दिनों से आमरण अनशन पर हैं। जाह्नवी रॉय तीन दिनों से उनके साथ अनशन पर बैठी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान जरूरी है।
जाह्नवी रॉय ने दी आज़ादी से बातचीत में कहा कि उनकी लड़ाई केवल उनकी व्यक्तिगत नौकरी या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक बिहार के हजारों-लाखों युवा वर्षों तक लाइब्रेरी और कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में देरी या अनियमितताओं के कारण उनका समय और अवसर दोनों प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई उन सभी छात्रों और अभ्यर्थियों की है जो नौकरी की उम्मीद में वर्षों तैयारी करते हैं।
वीडियो: गर्दनीबाग में आमरण अनशन पर क्यों बैठे हैं छात्र-अभ्यर्थी?
70वीं BPSC को रद्द करने की मांग क्यों?
गर्दनीबाग छात्र आंदोलन की सबसे प्रमुख मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की मांग है।
जाह्नवी रॉय से जब पूछा गया कि अगर 70वीं BPSC में अपनी मेहनत से सफल हुए योग्य अभ्यर्थी भी हैं तो पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करने की मांग क्यों की जा रही है, उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी मेहनत और योग्यता के आधार पर सफल हुए अभ्यर्थियों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने इस मामले में CBI जांच की मांग की।
जाह्नवी का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान RTI से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला दिया और कई चयनित अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।
जाह्नवी ने कहा कि जो अभ्यर्थी अपनी मेहनत से चयनित हुए हैं, उनका वह स्वागत करती हैं। उनका सवाल उन चयनित अभ्यर्थियों को लेकर है जिनके चयन में वह अनियमितता का आरोप लगा रही हैं।
15 सूत्री मांगों में क्या-क्या शामिल है?
आंदोलनकारियों के लिखित मांग-पत्र में बिहार की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की गई है। उनकी 15 सूत्री मांगें इस प्रकार हैं:
- 70वीं BPSC परीक्षा को पूरी तरह रद्द किया जाए।
- BSSC की इंटरमीडिएट, CGL, ASO और BSO समेत सभी लंबित परीक्षाएं जल्द कराई जाएं।
- सहायक प्राध्यापक भर्ती से पहले BET (Bihar Eligibility Test) अनिवार्य रूप से कराया जाए।
- TRE-4 भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए और एकल परीक्षा के साथ ‘One Candidate, One Result’ व्यवस्था लागू की जाए।
- 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द की जाए। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र, Answer Key और OMR शीट अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जाए।
- BPSC की रद्द की गई विभिन्न परीक्षाओं, जिनमें AEDO और SANITARY परीक्षाएं शामिल हैं, की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
- CSBC की सभी भर्ती परीक्षाओं के बाद प्रश्नपत्र, Answer Key और OMR शीट अनिवार्य रूप से जारी की जाए।
- 18 वर्षों से लंबित लाइब्रेरियन भर्ती और चार वर्षों से लंबित लेखपाल भर्ती तत्काल पूरी की जाए।
- बिहार में होने वाली सभी प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए 45 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तय की जाए।
- बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 85 प्रतिशत डोमिसाइल नीति (Domicile Policy) लागू की जाए।
- नियमित भर्ती प्रक्रियाओं में संविदाकर्मियों को दिया जाने वाला अतिरिक्त वेटेज पूरी तरह खत्म किया जाए।
- बिहार की सभी भर्ती परीक्षाओं के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी कर उसका सख्ती से पालन किया जाए।
- भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक (Paper Leak), अनियमितता और ‘सेटिंग’ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और जिम्मेदारी तय हो।
- स्वास्थ्य विभाग की Dresser भर्ती में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच हो और परीक्षा में सफल तथा Document Verification पूरा कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाए।
- BPSC Assistant Engineer की विज्ञापन संख्या 29-30-31/2025 का एक वर्ष से अधिक समय से लंबित परिणाम जल्द जारी किया जाए।

भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई सवाल उठा रहे आंदोलनकारी
जाह्नवी रॉय ने बातचीत में बिहार की कई भर्ती परीक्षाओं और लंबित भर्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने BSSC की लंबित भर्ती प्रक्रिया, TRE-4 के परीक्षा पैटर्न और 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती से जुड़े सवाल भी उठाए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए और अभ्यर्थियों को वर्षों तक परीक्षा और परिणाम का इंतजार नहीं करना चाहिए।
1,799 दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग
आंदोलनकारियों का आरोप है कि 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा में Mains का प्रश्नपत्र लीक हुआ। जाह्नवी रॉय ने इस परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग की है। लिखित मांग-पत्र में परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र, Answer Key और OMR शीट अभ्यर्थियों को देने की मांग भी शामिल है।
यह भी आंदोलनकारियों का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
TRE-4 में एकल परीक्षा और One Candidate, One Result की मांग
TRE-4 को लेकर आंदोलनकारियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी हो। मांग-पत्र में पहले की परीक्षाओं की तरह एकल परीक्षा और ‘One Candidate, One Result’ व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
आंदोलनकारी परीक्षा व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं।
पेपर लीक और पारदर्शिता पर आंदोलनकारियों के सवाल
आंदोलन की 15 सूत्री मांगों में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी शामिल है।
आंदोलनकारी चाहते हैं कि परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र, Answer Key और OMR शीट उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन को लेकर खुद भी जांच कर सकेंगे।
‘रात में डर लगता है, सो नहीं पाती’: गर्दनीबाग धरना स्थल पर सुरक्षा का सवाल
दी आज़ादी से बातचीत में जाह्नवी रॉय ने एक महिला अनशनकारी के तौर पर रात में धरना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का सवाल उठाया।
जाह्नवी ने कहा कि रात में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें डर लगता है। उनके मुताबिक रात में असामाजिक तत्व घूमते हैं और इस वजह से वह ठीक से सो नहीं पाती हैं।
उन्होंने बताया कि अनशनकारी कई दिनों से इस समस्या की जानकारी दे रहे थे और कई बार थाने का चक्कर भी लगा चुके थे। उनके अनुसार लिखित आवेदन देने के बाद भी तत्काल व्यवस्था नहीं हुई। बाद में छात्र और अनशनकारी फिर थाने पहुंचे और अपनी समस्या रखी। इसके बाद उनके अनुसार आज से कुछ प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
शौचालय के लिए भी प्रशासन से संघर्ष
जाह्नवी ने बताया कि नगर निगम की ओर से गर्दनीबाग धरना स्थल पर अस्थायी शौचालय की व्यवस्था की गई है। लेकिन उनके अनुसार रात में उसमें ताला लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर भी अनशनकारियों को प्रशासन और पुलिस के पास जाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि एक दिन शौचालय बंद होने के बाद अमन कुमार, जो कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे और जिनकी हालत कमजोर थी, ने भी इस समस्या को लेकर हस्तक्षेप किया। इसके बाद शौचालय खुला।
‘लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की यह सजा क्यों?’
जाह्नवी ने गर्मी के बीच धरना स्थल की बिजली काटे जाने का भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों को शौचालय, बिजली और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने इसी संदर्भ में सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के दावे पर भी सवाल उठाया और कहा कि एक तरफ बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा की बात होती है, वहीं दूसरी ओर धरना स्थल पर बैठी बेटियों को अपनी सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठानी पड़ रही है।

सुनवाई होती तो अनशन पर क्यों बैठते?
अमन कुमार ने दी आज़ादी से बातचीत में कहा कि पांच दिन से आमरण अनशन के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से सुनवाई होती तो वह अनशन पर नहीं बैठे होते। अमन ने धरना स्थल पर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष करने की स्थिति को अमानवीय बताया और कहा कि वे हर मोर्चे पर लड़ाई जारी रखेंगे।
अमन के मुताबिक जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
25 अगस्त को बिहार में मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान
आंदोलनकारियों ने 25 अगस्त को बिहार में मुख्यमंत्री आवास घेराव (CM Residence Gherao) का आह्वान किया है। जाह्नवी रॉय ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए छात्रों और अभ्यर्थियों से जुटने की अपील की है।
अमन कुमार ने भी बिहार के साथ-साथ देशभर के युवाओं, छात्रों और अभ्यर्थियों से 25 अगस्त को पटना पहुंचने की अपील की। उनके अनुसार सुबह 10 बजे गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से मुख्यमंत्री आवास के लिए मार्च किया जाएगा।
आगे क्या?
फिलहाल आंदोलनकारियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना और आमरण अनशन जारी रखने की बात कही है। अमन कुमार आज पांचवें दिन और जाह्नवी रॉय तीसरे दिन अनशन पर हैं।
25 अगस्त 2026 का मुख्यमंत्री आवास घेराव इस आंदोलन का अगला बड़ा कार्यक्रम है। इसके बाद सरकार और प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर आंदोलन की अगली दिशा तय हो सकती है।
गर्दनीबाग धरना स्थल पर दिनभर छात्रों की मौजूदगी और शाम से देर रात तक चल रही गतिविधियों के बीच आंदोलन को धीरे-धीरे लोगों का सहयोग भी मिलने लगा है। कुछ लोग अपने स्तर से बिस्किट, समोसा और भोजन के पैकेट लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच रहे हैं।
आंदोलनकारियों की मांगें पूरी होती हैं या सरकार उनसे बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल गर्दनीबाग में शिक्षा सत्याग्रह 2.0 के तहत छात्रों और अभ्यर्थियों का 15 सूत्री मांग के साथ अनिश्चितकालीन धरना और अनशन जारी है।




