Monday, 31 August 2026
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ज्योति पुंज अस्पताल में कथित लापरवाही से महिला अधिकारी की मौत, पटना कलेक्ट्रेट पर सिटीजन फोरम का प्रदर्शन

पटना के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल, ज्योति पुंज अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण उच्च न्यायालय की महिला अधिकारी काजल मिलन की मृत्यु ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बिहार की चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है।

क्या था मामला?

14 जुलाई 2025 को काजल मिलन ने ज्योति पुंज अस्पताल में प्रसव किया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के कुछ घंटों बाद काजल मिलन की स्थिति बिगड़ने लगी, लेकिन अस्पताल के डॉक्टर शिप्रा सिंह और अस्पताल प्रबंधन ने उनकी गंभीर स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया। काजल के भाई डॉ. मनीष कुमार का कहना है कि वे तीन घंटे तक अस्पताल प्रशासन से इलाज की गुहार लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर शिप्रा सिंह अस्पताल परिसर में मौजूद होते हुए भी उनकी बहन को देखने नहीं आईं। अंत में दर्द से कराहते हुए उनकी दुखद मृत्यु हो गई.

परिजनों के साथ मारपीट और फर्जी मुकदमा

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब काजल मिलन के भाई डॉ. मनीष कुमार ने जवाबदेही की मांग की, तो अस्पताल प्रबंधन ने उनके साथ मारपीट की और बाउंसरों से पिटवाया। इसके बाद परिजनों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज करवा दिया गया।

सिटीजन फोरम का विरोध प्रदर्शन

इस पूरे मामले को लेकर सिटीजन फोरम, पटना ने गांधी मैदान से कलेक्टरेट तक न्याय मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने काजल मिलन की मौत के लिए ज्योति पुंज अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान प्रदर्शन में काजल मिलन के भाई डॉ. मनीष कुमार भी शामिल हुए और उन्होंने अस्पताल की लापरवाही पर कड़ा विरोध जताया।

प्रदर्शन में क्या कहा गया?

सिटीजन फोरम के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार से मांग की कि मृतका के परिजनों के खिलाफ लगाए गए फर्जी मुकदमे को रद्द किया जाए और अस्पताल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही, बिहार के सरकारी और निजी अस्पतालों में आवश्यक सुधार की भी मांग की गई, ताकि आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

न्याय का सवाल

काजल मिलन की मौत एक महिला की त्रासदी नहीं, बल्कि यह बिहार की चिकित्सा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। एक जागरूक और शिक्षित महिला अधिकारी को भी सिस्टम की लापरवाही का शिकार होना पड़ा, तो आम नागरिक कितने असुरक्षित हैं, यह सवाल अब टाला नहीं जा सकता।

निजी अस्पतालों में इलाज की जगह मुनाफ़ा कमाने की होड़ ने मानवीय संवेदनाओं को कुचल दिया है। इस मामले में प्रशासन को सिर्फ जांच और आश्वासन के पुराने हथियार छोड़कर, कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए।

सिटीजन फोरम की मांग

  1. ज्योति पुंज अस्पताल के डॉक्टर शिप्रा सिंह और अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई।
  2. काजल मिलन के परिजनों पर से फर्जी मुकदमा रद्द किया जाए।
  3. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
  4. निजी अस्पतालों में मानवाधिकार और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

सिटीजन फोरम, पटना के प्रदर्शन में अनीश अंकुर, प्रीति सिन्हा, नन्द किशोर सिंह, विश्वजीत कुमार, संजय श्याम, जयप्रकाश ललन, निवेदिता, आकांक्षा प्रिया, अरुण कुमार मिश्र, मधु कुमारी, कृष्णा, डॉ. मनीष कुमार, पूनम शरण, राधेश्याम, उदयन राय, सूर्यकर जीतेन्द्र, आदित्य कमल अदि लोग शामिल थे।

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लेखक

Mukund Kumar

Mukund Kumar The Azadi के Contributor हैं और समाचार लेखन, रिपोर्टिंग एवं संपादन से जुड़े हैं। खेल जगत की गतिविधियों, कला और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सामाजिक एवं राजनीतिक हलचलों पर उनकी नजर रहती है। विभिन्न घटनाक्रमों को उनके संदर्भ और प्रभाव के साथ पाठकों तक पहुंचाने में उनकी विशेष रुचि है। उनका प्रयास खबरों को सहज भाषा में प्रस्तुत करने के साथ उन पहलुओं को सामने लाना है, जो आम पाठकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

2 प्रतिक्रियाएँ

  1. ज्योतिपुंज अस्पताल के डॉक्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

  2. my case is not yet registed after all it is alredy proved that Dr. Shipra Singh is done wrong treatement i ahve all the papers with clear report of medical invetigation committe. but no one taken action agaist them and she is still free and doing her medical experiment with human life.
    Due to her treatement i am now fiting with 3rd stage of cancer.
    Many Thanks,
    Preety Kumari
    7004838102

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