Monday, 31 August 2026
बिहार

BJP-RSS और मोदी सरकार की नीतियों पर अमरजीत कौर का तीखा हमला

पटना: केदार दास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान परिसर में आयोजित जगन्नाथ सरकार सभागार और गौरी गांगुली कक्ष के उद्घाटन समारोह में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने श्रम कानूनों, मजदूरों की समस्याओं, आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और भाजपा-आरएसएस की राजनीति समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। करीब 45 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की और श्रमिक अधिकारों तथा ट्रेड यूनियन आंदोलन से जुड़े सवाल उठाए।

अमरजीत कौर ने विशेष रूप से केंद्र सरकार के चार श्रम कानूनों, बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, महिला श्रमिकों और गिग वर्कर्स की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों का सवाल केवल मजदूरी और काम के घंटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से भी है।

श्रमिक आंदोलन और लोकतंत्र के संबंध पर अमरजीत कौर की बात

अपने संबोधन की शुरुआत में अमरजीत कौर ने श्रमिक आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आठ घंटे का कार्यदिवस, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार लंबे श्रमिक आंदोलनों के संघर्षों का परिणाम हैं।

उन्होंने कहा कि श्रमिक आंदोलन को केवल वेतन या काम के घंटों के सवाल तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मजदूरों के अधिकार और लोकतांत्रिक अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

अमरजीत कौर ने कहा कि श्रम अधिकारों से जुड़े कई प्रावधान लंबे संघर्षों के बाद हासिल किए गए हैं और मौजूदा समय में श्रम कानूनों में बदलाव को इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखने की जरूरत है।

केदार भवन में जगन्नाथ सरकार सभागार और गौरी गांगुली कक्ष के उद्घाटन करती अमरजीत कौर

चार श्रम कानूनों पर केंद्र सरकार को घेरा

अमरजीत कौर के भाषण का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार के चार श्रम कानूनों पर केंद्रित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों में किए गए बदलावों से मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और ट्रेड यूनियनों की भूमिका प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार इन बदलावों को श्रम कानूनों को सरल बनाने और सुधार के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि ट्रेड यूनियनों की ओर से इनके कई प्रावधानों पर लगातार आपत्तियां जताई गई हैं।

वेतन संहिता और न्यूनतम मजदूरी का सवाल

वेतन संहिता का उल्लेख करते हुए अमरजीत कौर ने न्यूनतम मजदूरी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मजदूरी तय करते समय श्रमिकों की वास्तविक जीवन-यापन लागत को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अलग-अलग राज्यों में मजदूरी की स्थिति अलग होने से समान काम करने वाले श्रमिकों के बीच आय में अंतर कैसे कम किया जाएगा।

उनके मुताबिक, न्यूनतम मजदूरी ऐसी होनी चाहिए जिससे मजदूर और उसका परिवार सम्मानजनक जीवन जी सके।

कार्यक्रम में दिया गया अमरजीत कौर का पूरा भाषण नीचे दिए गए वीडियो में देखा जा सकता है। Watch Video

औद्योगिक संबंध संहिता और हड़ताल का अधिकार

औद्योगिक संबंध संहिता पर अमरजीत कौर ने कहा कि इसके कुछ प्रावधानों से श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के सामूहिक कार्रवाई के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने हड़ताल और ट्रेड यूनियन गतिविधियों से संबंधित प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि श्रमिकों के सामूहिक अधिकारों को सीमित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार होना चाहिए।

उनके अनुसार, औद्योगिक शांति केवल तभी संभव है जब श्रमिकों के अधिकार और उनकी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था भी मजबूत हो।

सामाजिक सुरक्षा और असंगठित क्षेत्र

अमरजीत कौर ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, लेकिन उनके लिए सामाजिक सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

उन्होंने ठेका मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों, घरेलू कामगारों और गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा तथा रोजगार की स्थिरता का सवाल उठाया।

उनका कहना था कि कानून में किसी वर्ग को शामिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए प्रभावी और लागू होने योग्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है।

कार्यस्थल पर सुरक्षा और श्रमिकों की जान

कार्यस्थल की सुरक्षा पर बोलते हुए अमरजीत कौर ने औद्योगिक दुर्घटनाओं और श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि उत्पादन और मुनाफे के दबाव में श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन और श्रमिकों के स्वास्थ्य की रक्षा किसी भी उद्योग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

बेरोजगारी, महंगाई और निजीकरण पर चिंता

अमरजीत कौर ने बेरोजगारी, महंगाई और निजीकरण को मजदूर वर्ग के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में गिनाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं किए जा रहे हैं और महंगाई का असर श्रमिक परिवारों की आय पर पड़ रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण का विरोध करते हुए उन्होंने रेलवे, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, सार्वजनिक संस्थानों में निजीकरण की प्रक्रिया का असर रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

BJP-RSS की राजनीति पर भी निशाना

अमरजीत कौर ने अपने भाषण में भाजपा और आरएसएस की राजनीति की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में असहमति के स्वर को दबाने की कोशिश की जा रही है और ट्रेड यूनियन, छात्र तथा सामाजिक आंदोलनों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि श्रमिक आंदोलनों के अधिकारों की रक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अमरजीत कौर ने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को लेकर अपनी राजनीतिक असहमति जाहिर करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक और सामाजिक अधिकारों के सवाल पर व्यापक बहस जरूरी है।

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आर्थिक नीतियों पर टिप्पणी करते हुए अमरजीत कौर ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में कॉरपोरेट क्षेत्र को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जबकि मजदूरों और श्रमिक वर्ग की समस्याएं पर्याप्त प्राथमिकता नहीं पा रही हैं।

उन्होंने निजीकरण, श्रम कानूनों में बदलाव और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े फैसलों को इसी व्यापक आर्थिक नीति का हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि विकास की नीतियों का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि उससे रोजगार, मजदूरी और आम लोगों की सामाजिक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

राष्ट्रवाद के साथ रोजगार और आर्थिक सुरक्षा का सवाल

अमरजीत कौर ने राष्ट्रवाद के राजनीतिक इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के विकास और राष्ट्र की मजबूती का सवाल नागरिकों के रोजगार, आय और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता जैसे सवालों पर भी सार्वजनिक बहस होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

महिला श्रमिकों और गिग वर्कर्स की स्थिति

महिला श्रमिकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए अमरजीत कौर ने असमान वेतन, कार्यस्थल की सुरक्षा और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ कार्यस्थल को सुरक्षित और समान अवसर वाला बनाना जरूरी है।

गिग इकोनॉमी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐप आधारित और अस्थायी काम में लगे श्रमिकों के लिए रोजगार की स्थिरता, उचित पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

उन्होंने गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में प्रभावी तरीके से लाने की जरूरत पर जोर दिया।

अमेरिका, ट्रंप और वेनेजुएला पर भी रखी बात

अमरजीत कौर ने अपने भाषण में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने अमेरिका की नीतियों और डोनाल्ड ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए वेनेजुएला के संदर्भ में किसी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध किया।

उन्होंने भारत की विदेश नीति को लेकर कहा कि देश को अंतरराष्ट्रीय मामलों में स्वतंत्र और शांतिपूर्ण रुख अपनाना चाहिए।

ट्रेड यूनियन आंदोलन की भूमिका पर जोर

भाषण के अंतिम हिस्से में अमरजीत कौर ने ट्रेड यूनियन आंदोलन की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को व्यापक सामाजिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल से जोड़कर देखने की जरूरत है।

उनके मुताबिक, श्रमिक संगठनों की मजबूती से मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाने का मंच मिलता है।

उन्होंने ट्रेड यूनियनों से श्रमिकों की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी गतिविधियों को मजबूत करने और असंगठित क्षेत्र, महिला श्रमिकों तथा नए प्रकार के रोजगार में लगे लोगों को भी आंदोलन से जोड़ने की अपील की।

अमरजीत कौर का पूरा भाषण देखें

कार्यक्रम में अमरजीत कौर ने करीब 45 मिनट तक संबोधित किया। उनके पूरे भाषण में श्रम कानूनों, मजदूरों की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण, महिला श्रमिकों, गिग वर्कर्स, आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति समेत कई मुद्दों पर विचार रखे गए।

निष्कर्ष

केदार दास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अमरजीत कौर ने श्रम कानूनों और मजदूरों की स्थिति से जुड़े सवालों के साथ केंद्र सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों की आलोचना की। उन्होंने श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और ट्रेड यूनियन की भूमिका को लोकतांत्रिक अधिकारों के व्यापक संदर्भ से जोड़कर अपनी बात रखी।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट कार्यक्रम में अमरजीत कौर द्वारा दिए गए भाषण पर आधारित है। इसमें व्यक्त राजनीतिक विचार, आरोप और नीतियों से संबंधित टिप्पणियां वक्ता के हैं।

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