Monday, 31 August 2026
विशेष रिपोर्ट

एटक का 24वां बिहार राज्य सम्मेलन: मजदूर आंदोलन की नई दिशा और संघर्ष की रूपरेखा तय

खगड़िया। बिहार के मजदूर आंदोलन के इतिहास में खगड़िया जिला ने एक नया अध्याय जोड़ा। 2 से 4 अगस्त 2026 तक के.एन. क्लब में आयोजित ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के 24वें बिहार राज्य सम्मेलन ने श्रमिक अधिकारों, निजीकरण, सामाजिक सुरक्षा, स्कीम वर्कर्स, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर आगामी संघर्ष की दिशा तय की। तीन दिनों तक चले सम्मेलन में विशाल मजदूर रैली, आमसभा, प्रतिनिधि सत्र, संगठनात्मक चुनाव और नई राज्य कमिटी के गठन के साथ भविष्य की कार्ययोजना पर व्यापक मंथन हुआ।

सम्मेलन में 240 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंतिम दिन सर्वसम्मति से 41 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी और 101 सदस्यीय राज्य सामान्य परिषद का गठन किया गया। गजनफ्फर नवाब को बिहार राज्य कमिटी के अध्यक्ष और अजय कुमार को महासचिव चुना गया।

तीन दिनों के सम्मेलन में एटक की राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड अमरजीत कौर की प्रमुख उपस्थिति रही। सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड अमरजीत कौर ने बापू नगर स्थित भाकपा जिला कार्यालय योगीन्द्र भवन में स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व सांसद एवं भाकपा के पूर्व राज्य सचिव कॉमरेड योगीन्द्र शर्मा तथा पूर्व विधायक एवं भाकपा के पूर्व राज्य सचिव शहीद कॉमरेड सत्यनारायण सिंह की प्रतिमाओं का अनावरण किया। उसके बाद उन्होंने विशाल रैली का नेतृत्व किया और आमसभा को संबोधित किया।
आमसभा के बाद सम्मेलन का झंडोत्तोलन और प्रतिनिधि सत्र का विधिवत उद्घाटन किया तथा अंतिम दिन सम्मेलन के समापन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में सम्मेलन के निष्कर्ष और आगे के संघर्ष की दिशा पर अपनी बात रखी।

सम्मेलन के पहले दिन 2 अगस्त 2026 को खगड़िया शहर के बापू नगर स्थित एटक जिला कार्यालय योगीन्द्र भवन के परिसर से विशाल रैली निकाली गई।
रैली एम.जी. मार्ग, थाना रोड, मेन रोड, एसडीओ रोड, स्टेशन रोड और राजेन्द्र चौक होते हुए के.एन. क्लब पहुंची।
रैली और जुलूस का नेतृत्व करते हुए एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर खुली गाड़ी पर सवार होकर शहरवासियों और आमजन का अभिवादन स्वीकार करती हुई आगे बढ़ रही थीं। उनके साथ एटक के राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय नेताओं के अलावा बड़ी संख्या में मजदूर और संगठन के कार्यकर्ता चल रहे थे।
रैली की विशेषता विभिन्न क्षेत्रों के मेहनतकश तबकों की भागीदारी रही। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील कर्मी, खेत मजदूर, निर्माण कामगार और अन्य स्कीम वर्कर्स बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में एटक के लाल झंडों के साथ अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां थीं।

रैली में शामिल महिलाए

रैली के दौरान मजदूर और स्कीम वर्कर्स अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। “मजदूर एकता जिंदाबाद”, “श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन वापस लो”, “स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो” और “समान काम का समान वेतन लागू करो” जैसे नारों से खगड़िया शहर की सड़कें गूंजती रहीं।
रैली ‘के.एन. क्लब’ पहुंचने के बाद मौके पर विशाल आमसभा आयोजित की गई। आमसभा की अध्यक्षता एटक खगड़िया जिला महासचिव कुमारी निर्मला, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन के उप महासचिव पुनीत मुखिया और सम्मेलन स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रभाशंकर सिंह की अध्यक्षमंडली ने की।

सरकार की श्रम नीतियों पर अमरजीत कौर का हमला

Amarjeet Kaur
संबोधित करते एटक महासचिव कॉमरेड अमरजीत कौर

आमसभा को संबोधित करते हुए एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने केंद्र सरकार की आर्थिक एवं श्रम नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मजदूरों ने दशकों लंबे संघर्षों से जिन अधिकारों को हासिल किया, श्रम कानूनों में बदलाव के जरिए उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
उनका आरोप था कि पहले के श्रम कानूनों में मौजूद श्रमिक हितों की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर मालिकों और कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में किया जा रहा है। इससे नौकरी की सुरक्षा, ट्रेड यूनियन अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे सवालों पर मजदूर वर्ग के सामने गंभीर चुनौती पैदा हुई है।
अमरजीत कौर ने महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और ठेका प्रथा को भी प्रमुख सवाल के रूप में उठाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने और स्थायी रोजगार की जगह ठेका एवं आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देने का सबसे अधिक असर मेहनतकश वर्ग पर पड़ रहा है।
उन्होंने स्कीम वर्कर्स की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, मिड-डे मील कर्मियों और अन्य स्कीम वर्कर्स से महत्वपूर्ण एवं नियमित प्रकृति का काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें कर्मचारी का दर्जा और उसके अनुरूप वेतन व सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। उन्होंने इनके सवालों को मजदूर आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।

पहले दिन की आमसभा में छात्र और नौजवानों के आंदोलनों का सवाल भी प्रमुखता से उठा। अमरजीत कौर ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनरत छात्रों और नौजवानों के साथ सरकार दमनात्मक व्यवहार कर रही है। छात्रों पर पुलिस बल के इस्तेमाल और पेललेट गन चलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और नौजवानों को अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने और सरकार से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। जंतर-मंतर का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और युवाओं के बीच पैदा हुआ असंतोष आगे व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।
अमरजीत कौर ने मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान और महिलाओं के संघर्षों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए व्यापक जनएकता की जरूरत बताई।

आमसभा को एटक की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधान पार्षद उषा साहनी, पूर्व विधायक सूर्यकांत पासवान, खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामनरेश पांडेय, एटक बिहार राज्य महासचिव अजय कुमार सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
इस दौरान मंच पर एटक राज्य अध्यक्ष गजनफ्फर नवाब, एआईफुक्टो महासचिव अरुण कुमार, आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के महासचिव कुमार बिंदेश्वर, अध्यक्ष चंद्रावती देवी, इंसाफ के महासचिव इरफान अहमद फातमी और किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर सहित विभिन्न संगठनों के नेता मौजूद रहे।

एटक 24वें बिहार राज्स सम्मलेन का झंडोत्तोलन करती अमरजीत कौर

संध्या 5 बजे से के.एन. क्लब परिसर में प्रतिनिधि सत्र की गतिविधियां शुरू हुईं। एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने 24वें बिहार राज्य सम्मेलन का झंडोत्तोलन किया। इसके बाद शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर मजदूर आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसके उपरांत बेगूसराय के बिहट इप्टा की सांस्कृतिक टीम ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कलाकारों ने मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के जीवन, संघर्ष, शोषण और समस्याओं को केंद्र में रखकर जनवादी गीतों की प्रस्तुति दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद अमरजीत कौर ने प्रतिनिधि सत्र का विधिवत उद्घाटन किया। करीब एक घंटे से अधिक चले उद्घाटन भाषण में उन्होंने मजदूर वर्ग के सामने मौजूद चुनौतियों, ट्रेड यूनियन आंदोलन की भूमिका, एटक की ऐतिहासिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने एटक की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन ने आठ घंटे के कार्यदिवस, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष किए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को व्यापक स्तर पर संगठित करना होगा।

एटक का 24वाँ बिहार राज्य सम्मेलन: बिहार के मजदूर आंदोलन की नई दिशा और संघर्ष की रूपरेखा

सम्मेलन स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रभाशंकर सिंह ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए स्वागत वक्तव्य दिया।

प्रतिनिधि सत्र में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 240 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एटक बिहार राज्य कमिटी के महासचिव अजय कुमार ने संगठन का कार्य प्रतिवेदन पेश किया।

कार्य पर्तिवेदन प्रस्तुत करते राज्य महासचिव अजय कुमार

कार्य प्रतिवेदन में 23वें राज्य सम्मेलन से लेकर अबतक की गतिविधियों, आंदोलनों, संगठन की स्थिति और आगामी चुनौतियों को प्रतिनिधियों के सामने रखा गया। कोषाध्यक्ष अमरनाथ ने वित्तीय प्रतिवेदन एवं बजट प्रस्तुत किया।
प्रतिवेदन पर 25 प्रतिनिधियों ने बहस में भाग लिया। प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर संगठन विस्तार, औद्योगिक क्षेत्रों में यूनियन की मजबूती, स्कीम वर्कर्स के संघर्ष, असंगठित मजदूरों के संगठन और आगामी आंदोलनों को लेकर सुझाव तथा संशोधन रखे।
बहस में आए सुझावों और कुछ संशोधनों को शामिल करते हुए प्रतिवेदन को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
प्रतिनिधि सत्र गजनफ्फर नवाब, सी. सिंह, ललन कुमार और भरत झा की अध्यक्षमंडली एवं राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर और राष्ट्रीय सचिव उषा साहनी के पर्यवेक्षण में संचालित हुआ।

सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में रिक्त पड़े आठ लाख पदों को शीघ्र भरने का सवाल भी सम्मेलन में उठा। बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र के निजीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र पर हो रहे हमलों के विरोध में भी प्रस्ताव पारित किया गया।

प्रतिनिधि सत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में विभिन्न प्रस्ताव रहे। प्रस्तावों पर प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की तथा सुझावों को शामिल करते हुए उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया।
सम्मेलन ने सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश और निजीकरण की नीति का विरोध करते हुए सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने की मांग की। चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग को भी प्रमुखता से स्वीकार किया गया।
स्कीम वर्कर्स के सवाल पर सम्मेलन ने आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील रसोइयों और अन्य स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वेतन, ईएसआई, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वैधानिक श्रमिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) लागू करने की मांग भी प्रस्तावों में शामिल रही।
सम्मेलन ने बेगूसराय रिफाइनरी में ठेका श्रमिकों के उत्पीड़न की निंदा करते हुए मजदूरों को न्याय देने और मजदूर विरोधी कार्रवाई रोकने की मांग की। निर्माण कामगारों के पंजीकरण और पहचान पत्र बनाने में हो रही अनियमितताओं को समाप्त कर सभी पात्र निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सम्मेलन में नई शिक्षा नीति के विरोध, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी ILO के कन्वेंशन और गाइडलाइन लागू करने, पश्चिम एशिया में शांति कायम करने और 28 सितंबर 2026 को राजभवन, पटना मार्च में व्यापक भागीदारी करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया।

एटक राज्य सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधि

इस तरह सम्मेलन का एजेंडा सार्वजनिक क्षेत्र, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय श्रम मानक और वैश्विक शांति जैसे विषयों को भी मजदूर आंदोलन के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा गया।

4 अगस्त को सम्मेलन अपने अंतिम चरण में पहुंचा। तीन दिनों के संगठनात्मक और वैचारिक मंथन के बाद नई राज्य कमिटी का चुनाव हुआ और आगामी कार्ययोजना के साथ 24वें बिहार राज्य सम्मेलन का समापन किया गया।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से 41 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी एवं 101 सदस्यीय राज्य सामान्य परिषद का गठन किया गया।
गजनफ्फर नवाब को सर्वसम्मति से अध्यक्ष और अजय कुमार को महासचिव निर्वाचित किया गया।
राज्य उपाध्यक्ष के रूप में सूर्यकांत पासवान, सी. सिंह, भरत झा, प्रमोद नंदन, ललन लालित्य, डी.पी. यादव और चंद्रावती देवी निर्वाचित हुए।
उप महासचिव के रूप में उषा साहनी, ओमप्रकाश क्रांति, कुमार बिंदेश्वर, कौशलेंद्र कुमार वर्मा, रामविलास शर्मा, संजीव कुमार, जानकी पासवान और हरदेव ठाकुर चुने गए। अमरनाथ को राज्य कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

एटक 24वें राज्य सम्मलेन में निर्वाचित पदाधिकारियों की तस्वीर

नवनिर्वाचित राज्य महासचिव अजय कुमार के अनुसार नई राज्य कमिटी के सामने सम्मेलन में लिए गए फैसलों को जमीन पर उतारने, संगठन विस्तार करने और मजदूरों के विभिन्न हिस्सों को साझा संघर्ष से जोड़ने की जिम्मेदारी होगी।

सम्मेलन के समापन के बाद के.एन. क्लब परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता को एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने संबोधित किया।
उन्होंने तीन दिनों के सम्मेलन को बिहार के मजदूर आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां हुई चर्चा और पारित प्रस्तावों को केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संगठन इन्हें गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और कार्यस्थलों तक लेकर जाएगा तथा मेहनतकश वर्ग को संगठित कर आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।

अमरजीत कौर ने प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को कॉरपोरेटपरस्त बताते हुए निजीकरण, बेरोजगारी और श्रमिक अधिकारों के सवाल पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट जैसे मूल सवालों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जनता के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजदूरों के साथ-साथ छात्रों और नौजवानों के आंदोलनों पर होने वाली कार्रवाई को भी उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल से जोड़ा।

प्रेस वार्ता के दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमरजीत कौर ने भाजपा की हार को राजनीतिक संदेश बताते हुए कहा कि “भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।”

खगड़िया में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करती अमरजीत कौर

उन्होंने कहा कि जिस नौजवान वर्ग को भाजपा नेताओं ने “कॉकरोच” कहकर अपमानित किया था, उसी नौजवान वर्ग ने अब लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा को जवाब देना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा अब युवाओं के सामने भाजपा के जुमले नहीं चलेंगे। युवा रोजगार, शिक्षा और अपने अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं और सरकार को इनका जवाब देना होगा।
उनका कहना था कि जनता के अधिकारों का हनन और लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रेस वार्ता में एटक की राष्ट्रीय सचिव उषा साहनी, नवनिर्वाचित राज्य अध्यक्ष गजनफ्फर नवाब, राज्य महासचिव अजय कुमार, एटक खगड़िया जिला महासचिव कुमारी निर्मला, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन के उप महासचिव पुनीत मुखिया, प्रभाकर प्रसाद सिंह, प्रभाशंकर सिंह और रविन्द्र यादव सहित नवनिर्वाचित पदाधिकारी एवं अन्य नेता मौजूद रहे।

एटक के 24वें बिहार राज्य सम्मेलन की तीन दिनों की पूरी प्रक्रिया को देखें तो इसके तीन प्रमुख आयाम सामने आते हैं। पहला, संगठन ने विशाल रैली और आमसभा के माध्यम से मजदूरों और स्कीम वर्कर्स की भागीदारी को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। दूसरा, प्रतिनिधि सत्र में संगठन के पिछले काम की समीक्षा

के साथ भविष्य की रणनीति पर लोकतांत्रिक बहस हुई। तीसरा, नई राज्य कमिटी के गठन के साथ सम्मेलन के प्रस्तावों को राज्यव्यापी आंदोलन में बदलने की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंपी गई।

सम्मेलन में स्कीम वर्कर्स के सवाल को जिस प्रमुखता से उठाया गया, वह बदलते परिदृश्य में ट्रेड यूनियन आंदोलन की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा, मिड-डे मील कर्मियों, निर्माण कामगारों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या बड़ी है, लेकिन रोजगार की प्रकृति और सामाजिक सुरक्षा के मामले में उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एटक ने इन तबकों को संगठित मजदूर आंदोलन से जोड़ने को अपने आगामी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण, सरकारी रिक्तियों, बैंकिंग-बीमा क्षेत्र, ठेका मजदूरों और लेबर कोड के सवाल सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे के रूप में सामने आए। नई शिक्षा नीति, छात्र आंदोलन, लोकतांत्रिक अधिकार, ILO कन्वेंशन और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने जैसे मुद्दों को शामिल कर सम्मेलन ने अपने विमर्श का दायरा व्यापक रखा।

तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया कि एटक आने वाले समय में मजदूर, किसान, स्कीम वर्कर्स, खेत मजदूरों, निर्माण कामगारों, असंगठित श्रमिकों तथा अन्य मेहनतकश तबकों के सवालों को केंद्र में रखकर राज्यव्यापी संघर्ष को और व्यापक बनाएगी। सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के अनुरूप संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और आंदोलन तेज करने की जिम्मेदारी नई राज्य कमिटी को सौंपी गई है। इसी कड़ी में 28 सितंबर 2026 को पटना में प्रस्तावित राजभवन मार्च को सम्मेलन के बाद घोषित प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। खगड़िया में आयोजित यह सम्मेलन केवल नई राज्य कमिटी के गठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार में ट्रेड यूनियन आंदोलन की आगामी दिशा, संगठनात्मक प्राथमिकताओं और संघर्ष की रूपरेखा भी तय किया है।

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लेखक

Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार और वीडियो जर्नलिस्ट हैं। वे The Azadi (दी आज़ादी) के संस्थापक हैं। वे बिहार सहित विभिन्न जनसरोकार से जुड़े मुद्दों, राजनीति, समाज, लोकतंत्र और स्थानीय घटनाओं पर समाचार रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्ट, वीडियो कवरेज, साक्षात्कार और विश्लेषण करते हैं

The Azadi के माध्यम से वे उन खबरों और जनसमस्याओं को प्रमुखता देने का प्रयास करते हैं, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।

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