Saturday, 7 November 2026
राजनीति

नेहा बोरा का BJP-RSS पर तीखा हमला, बोलीं- ‘हिंदुस्तान की आवाम से नागरिकता का सबूत मांगने वाले आप कौन होते हैं?’

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, नागरिकता का प्रमाण मांगने और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।

नेहा बोरा ने अपने संबोधन में सवाल उठाया कि आखिर आम भारतीय नागरिकों से उनकी नागरिकता का सबूत मांगने का अधिकार किसने दिया है? उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मुसलमानों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और गरीब-मजदूरों को बार-बार दस्तावेजों और प्रमाणों के लिए परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR को पूरी तरह वापस लेने और वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को वापस लेने की मांग भी उठाई।

नेहा बोरा वीडियो यहां देखें:

‘हिंदुस्तान की आवाम से नागरिकता का सबूत मांगने वाले आप कौन होते हैं?’

रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि भारत के संविधान के तहत हर नागरिक को समान दर्जा प्राप्त है और लोकतंत्र में एक वोट उस समानता का प्रतीक है। उनके मुताबिक, जब किसी व्यक्ति का वोट छीन लिया जाता है तो उसे अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘आप होते कौन हैं हिंदुस्तान की आवाम को यह पूछने वाले कि तुम अपनी सिटीजनशिप प्रूफ करो।’

नेहा बोरा ने विशेष रूप से मुसलमानों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और गरीब मजदूरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वर्गों के लोगों को बार-बार लाइनों में खड़ा करके उनसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि वर्षों से इस देश में रहने वाले और देश के विकास में योगदान देने वाले आम लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बार-बार क्यों मजबूर किया जा रहा है?

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है।

BJP और RSS पर स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर निशाना

अपने भाषण में नेहा बोरा ने BJP और RSS पर स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास तथा देश की लोकतांत्रिक विरासत को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने भगत सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि देश की विरासत भगत सिंह की है, न कि ‘माफीवीर सावरकर’ की।

उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में हिंदू, मुस्लिम और अलग-अलग जातियों एवं समुदायों के लोगों ने मिलकर संघर्ष किया था। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, लेकिन उनके अनुसार मौजूदा राजनीतिक माहौल में समाज के भीतर नफरत और विभाजन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

RSS के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने संगठन पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उसकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो संगठन आज देशभक्ति के प्रमाणपत्र बांटने की बात करता है, उसे अपने इतिहास पर भी जवाब देना चाहिए।

नेहा बोरा ने अपने संबोधन में कहा, ‘हिंदुस्तान का गौरवान्वित इतिहास में ना कभी भाजपा की जगह थी, ना कभी आरएसएस की जगह थी।’

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में जब देश के लोकतंत्र और संघर्ष का इतिहास लिखा जाएगा, तब उनके मुताबिक BJP और RSS को इतिहास में सम्मानजनक स्थान नहीं मिलेगा।

अंग्रेजों की नीतियों से की मौजूदा कार्रवाई की तुलना

नेहा बोरा ने अपने भाषण में ब्रिटिश शासन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह अंग्रेज स्वतंत्रता सेनानियों को दबाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाते थे, उसी तरह आज लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में स्वतंत्रता सेनानियों से पीस बॉन्ड (शांति बांड) पर हस्ताक्षर करवाए जाते थे और उन्हें जेल भेजा जाता था। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि आज भी लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को इसी तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा लेकर सड़कों पर निकले प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, उनके कपड़े फाड़े गए और महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न हुआ। ये आरोप उन्होंने अपने भाषण में लगाए।

उन्होंने कहा कि सरकार यह समझ रही थी कि देश की आम जनता अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना भूल चुकी है, लेकिन रामलीला मैदान में जुटे लोगों ने इस धारणा को गलत साबित किया है।

SIR और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर कई राज्यों के आंकड़े रखे

नेहा बोरा ने अपने संबोधन में केवल दिल्ली की राजनीति तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।

उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में करीब 61 हजार मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उनकी जानकारी के बिना फॉर्म-7 के आवेदन आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 10,470 मतदाताओं के नाम से फॉर्म-8 के आवेदन किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में महिलाओं और मुस्लिम मतदाताओं पर असर पड़ा है। उन्होंने अपने भाषण में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर 70 प्रतिशत से अधिक का आंकड़ा भी बताया।

इसी तरह उत्तराखंड में पांच हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया।

गौरतलब है कि ये आंकड़े नेहा बोरा ने अपने भाषण में प्रस्तुत किए हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित सरकारी आंकड़ों के रूप में नहीं, बल्कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।

फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 को लेकर उठाए सवाल

नेहा बोरा ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को पुराने मतदाताओं से भरवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के जरिए किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आवेदन किया जा सकता है, जबकि फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में विवरण बदलने या संशोधन के लिए किया जाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर आवेदन करके उसके वोट को हटाने या उसकी जानकारी बदलने की कोशिश क्यों की जा रही है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-7 मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने तथा फॉर्म-8 मौजूदा मतदाता के विवरण में सुधार और पते में बदलाव जैसी प्रक्रियाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए नेहा बोरा ने इन फॉर्मों के कथित दुरुपयोग को लेकर जो सवाल उठाए, वे मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़े हैं।

‘लोकतंत्र केवल चुनाव जीतकर संसद में बैठने का नाम नहीं’

नेहा बोरा ने अपने भाषण में लोकतंत्र की व्यापक परिभाषा रखते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव लड़कर संसद में बैठ जाने तक सीमित नहीं है। यह देश की जनता से किया गया समानता और अधिकारों का वादा है।

उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों का बड़ा योगदान है। यही लोग सड़कें, संसद भवन और सार्वजनिक संस्थान बनाते हैं, लेकिन उनके ही अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

नेहा बोरा ने इसे देश की आजादी के बाद लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की एक बड़ी लड़ाई बताते हुए ‘सेकंड बैटल ऑफ इंडिपेंडेंस’ यानी दूसरी आजादी की लड़ाई करार दिया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग

अपने भाषण के अंतिम हिस्से में नेहा बोरा ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि SIR को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए और वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को भी वापस होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय है। SIR का कंप्लीट रोल बैक होना होगा। 2023 के एक्ट को वापस होना होगा।’

इसके बाद उन्होंने मंच से नारे भी लगवाए। ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे के साथ उन्होंने लोगों से लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

INDIA गठबंधन की महारैली में जुटे विपक्ष के कई बड़े नेता

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी संगठनों के प्रमुख नेता शामिल हुए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, PDP की महबूबा मुफ्ती सहित कई नेता इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

इसके अलावा CPI के महासचिव डी. राजा, CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी, CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, शिवसेना (UBT) के संजय राउत और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

राहुल गांधी ने कहा- ज्ञानेश कुमार को हटाना पहली शर्त

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश को सही दिशा में ले जाने का पहला कदम ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित हेरफेर के कारण देश के नागरिकों की आवाज प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल वोट की चोरी नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवाज की चोरी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनके लिए हर भारतीय नागरिक की आवाज सबसे महत्वपूर्ण है।

खड़गे ने दिया ‘मोदी हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ का नारा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवाओं, महिलाओं और दलितों के मताधिकार पर खतरा पैदा किया जा रहा है।

खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि विपक्ष केंद्रीय जांच एजेंसियों या पुलिस कार्रवाई से डरने वाला नहीं है। उन्होंने ‘मोदी हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ का नारा भी दिया।

ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव और SIR का मुद्दा उठाया

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किया गया।

उन्होंने कहा कि बंगाल को SIR का शिकार बनाया गया है और उनकी पार्टी चुनाव में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर मतगणना प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।

तेजस्वी यादव ने शकुनि और महाभारत का किया जिक्र

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रामलीला मैदान को महाभारत के कुरुक्षेत्र से जोड़ते हुए कहा कि आज की लड़ाई देश के वोटरों और वोट चोरी करने वालों के बीच है।

उन्होंने महाभारत के शकुनि का जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने कहा कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी विपक्ष इस मुद्दे को उठाएगा।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का मुद्दा उठाया

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची और कथित वोट कटौती को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दावे का जिक्र किया जिसमें करीब 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम सूची में नहीं होने की बात कही गई थी।

अखिलेश यादव ने सवाल किया कि यदि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम गायब हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने आरोप लगाया कि BJP चुनाव आयोग का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती है।

वामपंथी नेताओं ने भी उठाई SIR वापस लेने की मांग

CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने SIR को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि यह आम लोगों के मतदान अधिकार को छीनने की कोशिश है। उन्होंने मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने इसे देश की दूसरी आजादी की लड़ाई बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। वहीं CPI के महासचिव डी. राजा ने कहा कि विपक्ष का यह अभियान लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए है।

फारूक अब्दुल्ला ने मुसलमानों को पाकिस्तानी कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने इस देश के लिए अपना खून दिया है और आगे भी देते रहेंगे। महबूबा मुफ्ती ने भी केंद्र सरकार की नीतियों और धार्मिक राजनीति को लेकर सवाल उठाए।

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लेखक

Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार और वीडियो जर्नलिस्ट हैं। वे The Azadi (दी आज़ादी) के संस्थापक हैं। वे बिहार सहित विभिन्न जनसरोकार से जुड़े मुद्दों, राजनीति, समाज, लोकतंत्र और स्थानीय घटनाओं पर समाचार रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्ट, वीडियो कवरेज, साक्षात्कार और विश्लेषण करते हैं

The Azadi के माध्यम से वे उन खबरों और जनसमस्याओं को प्रमुखता देने का प्रयास करते हैं, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।

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