नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रैली को कॉकरोच जनता पार्टी ने समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी दी।
पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपनी सरकार चुनती है, न कि सरकार जनता को चुनती है। उसके मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंकाएं सामने आई हैं, जिससे मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मतदान के समान अधिकार पर दिया जोर
कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को समान मतदान का अधिकार देने की व्यवस्था की थी। जाति, धर्म, लिंग, शिक्षा या आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी के मतदान अधिकार में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
पार्टी ने जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित संविधान निर्माण से जुड़े नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक नागरिक की आवाज को समान महत्व देना जरूरी है। उसके अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक से अधिक पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर उठाए सवाल
पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं के कारण कई नागरिकों में मतदान के अधिकार से वंचित होने का डर पैदा हुआ है। उसने चुनाव आयोग से प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करने की मांग की।
कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी कहा कि वह देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों का समर्थन करेगी। संस्थापक अभिजीत दिपके के मुताबिक, इंडिया गठबंधन की रैली को समर्थन देने का फैसला राजनीतिक लाभ के बजाय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
रामलीला मैदान में होगी इंडिया गठबंधन की रैली
इंडिया गठबंधन ने चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग को लेकर कई कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें मॉक संसदीय सत्र और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली शामिल हैं।
रैली के जरिए विपक्षी दल एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से ऐसी मांगों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया है और चुनाव आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर जोर दिया गया है।




