Saturday, 5 September 2026
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CAG रिपोर्ट में बिहार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल, धीरेंद्र झा ने नीतीश सरकार को घेरा

पटना। बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन और बजट के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की 2023-24 की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में राजकोषीय घाटे, बजट प्रबंधन, उपयोगिता प्रमाणपत्रों के लंबित रहने और सरकारी योजनाओं में धन के इस्तेमाल से जुड़े कई बिंदुओं पर स्थिति का आकलन किया गया है।

CAG की यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2023-24 में बिहार सरकार के राज्य वित्त का लेखापरीक्षण करती है। रिपोर्ट 24 जुलाई 2025 को बिहार विधानसभा में पेश की गई थी।

राजकोषीय घाटा तय सीमा से ऊपर

CAG के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में बिहार का राजकोषीय घाटा ₹35,659.88 करोड़ रहा, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 4.17 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 के लिए राजकोषीय घाटे की सीमा 3.50 प्रतिशत निर्धारित थी। इस लिहाज से वास्तविक राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा से ऊपर रहा।

हालांकि, इसी वित्त वर्ष में बिहार को ₹2,833.06 करोड़ का राजस्व अधिशेष भी हुआ। CAG ने कहा कि राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि और राजस्व व्यय की अपेक्षाकृत कम वृद्धि के कारण राज्य राजस्व अधिशेष की स्थिति में पहुंचा।

49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित

रिपोर्ट में सरकारी अनुदानों से जुड़े 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificates) समय पर जमा नहीं होने का भी उल्लेख है।

CAG के अनुसार, इन लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों से जुड़ी कुल राशि ₹70,877.61 करोड़ थी। इनमें से ₹14,452.38 करोड़ की राशि 2016-17 तक की अवधि से संबंधित थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों में बड़ी रकम कई विभागों से जुड़ी थी। इनमें पंचायती राज विभाग से संबंधित राशि करीब ₹28,154.10 करोड़, शिक्षा विभाग की करीब ₹12,623.67 करोड़, शहरी विकास विभाग की करीब ₹11,065.50 करोड़ और ग्रामीण विकास विभाग की करीब ₹7,800.48 करोड़ थी।

उपयोगिता प्रमाणपत्र यह बताने में मदद करते हैं कि सरकारी अनुदान के रूप में जारी धन का निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हुआ या नहीं। इसलिए बड़ी संख्या में लंबित प्रमाणपत्र वित्तीय निगरानी और लेखांकन की गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

बजट प्रबंधन पर भी CAG की टिप्पणी

CAG की रिपोर्ट में बजट प्रावधान और वास्तविक खर्च के बीच अंतर से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में ₹11,042.66 करोड़ के 13 अनुपूरक प्रावधान ऐसे थे जिन्हें CAG ने अनावश्यक पाया, क्योंकि संबंधित मामलों में खर्च मूल बजट प्रावधान के स्तर तक भी नहीं पहुंचा था।

रिपोर्ट में बड़ी बचत, अनावश्यक पुनर्विनियोजन और कुछ योजनाओं में धन के पूरी तरह इस्तेमाल नहीं होने से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं।

CAG ने यह भी दर्ज किया कि 2023-24 में राज्य के कुल व्यय में वृद्धि हुई, लेकिन बजट प्रबंधन के कुछ हिस्सों में अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच उल्लेखनीय अंतर रहा।

मार्च में बड़ी राशि निकालने और बिलों का मामला

बिहार के वित्तीय लेखे की जांच के दौरान CAG ने 5,088 Abstract Contingent (AC) Bills के माध्यम से ₹4,718.24 करोड़ निकाले जाने का उल्लेख किया है। इनमें मार्च 2024 में ही ₹1,041.12 करोड़ निकाले गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक 22,130 AC Bills से संबंधित ₹9,205.76 करोड़ के Detailed Contingent Bills का समायोजन लंबित था।

CAG ने कहा है कि सरकार के खातों से राशि निकालकर उसका समय पर लेखांकन नहीं होने की स्थिति में धन के दुरुपयोग या अनावश्यक खर्च की संभावना बढ़ सकती है।

बिहार की प्रति व्यक्ति आय और गरीबी की स्थिति

CAG की रिपोर्ट में बिहार की आर्थिक स्थिति का भी आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में बिहार का प्रति व्यक्ति GSDP ₹66,828 था।

रिपोर्ट के राज्य प्रोफाइल में बिहार में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी का आंकड़ा 33.74 प्रतिशत दिया गया है। CAG ने बिहार की प्रति व्यक्ति आय की तुलना पड़ोसी राज्यों से भी की है।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 2023-24 में बिहार की GSDP वृद्धि दर मौजूदा कीमतों पर 14.47 प्रतिशत रही।

सामाजिक क्षेत्र के खर्च में भी बदलाव

CAG की रिपोर्ट में सामाजिक सेवाओं के विभिन्न क्षेत्रों में खर्च के रुझान का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में पिछले वर्ष की तुलना में आवास क्षेत्र में खर्च में 94.05 प्रतिशत और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण से संबंधित खर्च में 65.96 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के खर्च में भी 24.07 प्रतिशत की कमी बताई गई है।

दूसरी ओर ग्रामीण रोजगार, बाढ़ नियंत्रण तथा सड़क एवं पुल जैसे कुछ आर्थिक क्षेत्रों में खर्च बढ़ने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

धीरेंद्र झा ने रिपोर्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधा

CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद खेग्रामस के महासचिव धीरेंद्र झा ने बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट राज्य के वित्तीय प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

झा ने सरकार पर वित्तीय आंकड़ों को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में विकास और रोजगार से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने बिहार में संस्थागत पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

मजदूरों के पलायन के आंकड़े पर भी सवाल

धीरेंद्र झा ने बिहार से बाहर काम करने वाले मजदूरों की संख्या को लेकर विधानसभा में दिए गए एक बयान पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने दावा किया कि राज्य से बाहर काम करने वाले मजदूरों की संख्या विधानसभा में बताए गए आंकड़े से काफी अधिक है। यह धीरेंद्र झा का दावा है, जिसे CAG की वित्तीय रिपोर्ट का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

CAG की इस रिपोर्ट का मुख्य विषय बिहार सरकार के 2023-24 के वित्तीय प्रबंधन, बजट, राजस्व-व्यय, राजकोषीय स्थिति और लेखांकन से जुड़े मुद्दे हैं।

CAG रिपोर्ट में क्या तस्वीर सामने आती है?

पूरी रिपोर्ट को देखें तो बिहार की वित्तीय स्थिति की तस्वीर एकतरफा नहीं है। एक तरफ राज्य ने 2023-24 में ₹2,833 करोड़ का राजस्व अधिशेष दर्ज किया और GSDP में 14.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी तरफ राजकोषीय घाटा 4.17 प्रतिशत रहा, जो निर्धारित 3.50 प्रतिशत की सीमा से ऊपर था।

इसके अलावा बड़ी संख्या में उपयोगिता प्रमाणपत्रों का लंबित रहना, बजट प्रावधानों के मुकाबले कम खर्च, कुछ अनुपूरक बजट प्रावधानों का अनावश्यक साबित होना और कुछ मामलों में लेखांकन से जुड़ी देरी वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों को सामने रखते हैं।

रिपोर्ट से सरकार के सामने क्या सवाल?

CAG की टिप्पणियों के आधार पर बिहार सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं—सरकारी अनुदानों के उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर क्यों लंबित रहे, बजट में किए गए प्रावधानों और वास्तविक खर्च में इतना अंतर क्यों रहा और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए?

इसी तरह सामाजिक क्षेत्र में खर्च में आई कमी और विभिन्न योजनाओं में धन के इस्तेमाल की स्थिति भी सरकार के लिए जवाबदेही का विषय बनती है।

हालांकि CAG की रिपोर्ट किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में राजनीतिक टिप्पणी नहीं है। यह सरकारी वित्त और लेखांकन की स्थिति का लेखापरीक्षित आकलन है। रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों के आधार पर सरकार और संबंधित विभागों से जवाबदेही की अपेक्षा की जा सकती है।

निष्कर्ष

बिहार के 2023-24 के वित्तीय प्रबंधन पर CAG की रिपोर्ट में राजकोषीय घाटे, लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र, बजट प्रबंधन और कुछ योजनाओं में खर्च की स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

रिपोर्ट में जहां बिहार की अर्थव्यवस्था में वृद्धि और राजस्व अधिशेष की स्थिति दर्ज की गई है, वहीं वित्तीय अनुशासन और बजट के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

राजनीतिक तौर पर इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन CAG के निष्कर्ष और राजनीतिक दलों के आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। बिहार में सरकारी धन के इस्तेमाल, योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों पर सार्वजनिक जवाबदेही और गंभीर चर्चा की जरूरत बनी हुई है।

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लेखक

Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार और वीडियो जर्नलिस्ट हैं। वे The Azadi (दी आज़ादी) के संस्थापक हैं। वे बिहार सहित विभिन्न जनसरोकार से जुड़े मुद्दों, राजनीति, समाज, लोकतंत्र और स्थानीय घटनाओं पर समाचार रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्ट, वीडियो कवरेज, साक्षात्कार और विश्लेषण करते हैं

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