मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को दिल्ली में प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही आयोजित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से समझौता करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार पर देश और संविधान के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
इस कार्यक्रम के लिए कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर लोकसभा के सदन जैसा विशेष मंच तैयार किया गया था। इसमें लोकसभा अध्यक्ष के आसन सहित सदन के आंतरिक हिस्से की प्रतिकृति बनाई गई थी। इसी मंच पर ‘पब्लिक इम्पीचमेंट ऑफ ज्ञानेश कुमार’ यानी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग की प्रतीकात्मक कार्यवाही आयोजित की गई। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छह प्रमुख आरोपों को पढ़ने के साथ हुई। उन्होंने इन आरोपों के आधार पर एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे प्रतीकात्मक कार्यवाही के दौरान विचार और पारित करने के लिए रखा गया। कांग्रेस ने इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को सार्वजनिक मंच से उठाया।
ज्ञानेश कुमार पर लगाए छह आरोप
कांग्रेस की ओर से पेश प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह प्रमुख आरोप लगाए गए। पार्टी का आरोप है कि उन्होंने चुनावों में कथित तौर पर धांधली की साजिश रची और 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए। इसके अलावा कांग्रेस ने दावा किया कि संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किया गया और ECINET के माध्यम से मतदाता सूचियों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
प्रस्ताव में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से अलग रखा। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया। पार्टी ने इन सभी मुद्दों को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।
हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और कार्यक्रम में इन्हें प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया।
खड़गे बोले- लोकतंत्र की बुनियाद बचाना चाहते हैं
कार्यवाही को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर ज्ञानेश कुमार की मौजूदगी निष्पक्ष चुनाव, लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “हम लोकतंत्र की उस बुनियाद को बचाना चाहते हैं, जिसे भाजपा से खतरा पैदा हो रहा है।”
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की मांग दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

2023 के कानून को रद्द करने की भी मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित 2023 के कानून को भी तत्काल रद्द करने की मांग की। यह कानून मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा उनके कार्यकाल और सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधान निर्धारित करता है।
खड़गे ने इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को व्यापक कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है, जिससे उनकी जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।
INDIA गठबंधन के समर्थन का किया दावा
खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि INDIA गठबंधन के सदस्य देश की 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन की ओर से इस प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यवाही के माध्यम से मांग की जा रही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह के आरोप में अदालत में मुकदमा चलाया जाए।
इस दौरान खड़गे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर युवाओं को भड़काने के आरोप लगाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि संविधान को अपनाए जाने के बाद से ही संघ वयस्क मताधिकार का विरोध करता रहा है।
‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के लगे नारे
कार्यवाही के दौरान जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया और उस पर बहस शुरू करने की बात कही, तो वहां मौजूद INDIA गठबंधन के नेताओं ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया। इस दौरान नेताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे भी लगाए।
कांग्रेस की ओर से आयोजित यह ‘जन महाभियोग’ वास्तविक संसदीय महाभियोग प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के खिलाफ पार्टी के विरोध को दर्ज कराने के लिए आयोजित एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसके जरिए कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई।




