पटना: पटना की सड़कों पर बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का राजभवन मार्च केवल एक राजनीतिक जुलूस नहीं रहा। जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च डाकबंगला चौराहे की बैरिकेडिंग पार करता हुआ इनकम टैक्स चौराहे तक पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने फिर बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारियों की अगली कतार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मौजूद थे। हाथ में तिरंगा लिए तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारियों के साथ वाटर कैनन की बौछार झेली। इसके बाद उन्होंने बैरिकेड से नीचे उतरकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने तेजस्वी यादव, संजय यादव, मीसा भारती समेत RJD के कई प्रमुख नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया।
इसके बाद भी प्रदर्शन थमा नहीं। हिरासत में लिए गए नेताओं को जिस बस से सचिवालय थाने ले जाया जा रहा था, उसके चारों ओर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। बस की खिड़कियों और ऊपर तक प्रदर्शनकारी दिखाई दिए। हाथों में तिरंगा लिए इस भीड़ की तस्वीर पूरे प्रदर्शन की सबसे अलग तस्वीरों में रही।
जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च
वीडियो में देखिए पूरा घटनाक्रम
राजद ने यह मार्च छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित किया था। पेपर लीक, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल का सवाल मार्च के प्रमुख मुद्दों में था।
जेपी गोलंबर से मार्च शुरू होने के बाद तेजस्वी यादव पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आगे रहे। इस मार्च की एक खास बात यह थी कि भीड़ में लोगों के हाथों में तिरंगा था।
नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। मार्च का लक्ष्य लोकभवन (पहले राजभवन) की ओर जाना था।
डाकबंगला की बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ी भीड़

जेपी गोलंबर से आगे बढ़ते हुए मार्च डाकबंगला चौराहे पर पहुंचा। यहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ बैरिकेड तक पहुंची और उसे पार करते हुए आगे बढ़ गई। इस दौरान पुलिस की ओर से तत्काल कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। भीड़ लगातार आगे बढ़ती रही और मार्च इनकम टैक्स चौराहे की तरफ बढ़ गया।
पटना में बड़े राजनीतिक मार्चों को रोकने के लिए डाकबंगला चौराहा आम तौर पर महत्वपूर्ण पुलिस बैरियर होता है। ऐसे मौकों पर भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग के साथ वाटर कैनन और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी किया जाता है।
लेकिन इस मार्च में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोगों के आगे बढ़ने के दौरान पुलिस संयम बरतती दिखाई दी। स्थिति को संभालने की कोशिश होती रही और मार्च आगे बढ़ता गया।
इनकम टैक्स चौराहे पर पहुंचने के बाद हालात बदल गए।
इनकम टैक्स पर तेजस्वी सबसे आगे
इनकम टैक्स चौराहे पर पुलिस ने फिर बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों ने यहां भी बैरिकेड के आगे पहुंचकर आगे बढ़ने की कोशिश की।
इस समय तेजस्वी यादव स्वयं प्रदर्शनकारियों की अगली कतार में थे। उनके हाथ में तिरंगा था। वह बैरिकेड पर चढ़कर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहे।

पुलिस ने इसके बाद वाटर कैनन चलाया।
पानी की तेज बौछार सीधे प्रदर्शनकारियों की ओर गई। तेजस्वी यादव भी इसकी चपेट में आए। वह पीछे हटने के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ वहीं खड़े रहे और वाटर कैनन की बौछार झेलते रहे।
पुलिस की दो वाटर कैनन गाड़ियों से लगातार पानी छोड़ा गया। कुछ समय तक बौछार जारी रही। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड के पास डटे रहे।
इसके बाद तेजस्वी यादव बैरिकेड से नीचे उतरे। उनके साथ मौजूद प्रदर्शनकारियों ने भी आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखी।
वाटर कैनन के बाद शुरू हुई हिरासत की कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश के बीच पुलिस ने तेजस्वी यादव समेत RJD के प्रमुख चेहरों को हिरासत में लेना शुरू किया।
तेजस्वी यादव के साथ संजय यादव, मीसा भारती और अन्य नेताओं को पुलिस बस में बैठाया गया। बस को सचिवालय थाने ले जाने की तैयारी शुरू हुई।
लेकिन मामला यहां भी खत्म नहीं हुआ।
बस के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। लोग बस के चारों तरफ बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। कई प्रदर्शनकारी बस की खिड़कियों से लटककर खड़े दिखाई दिए। कुछ लोग बस के ऊपर भी चढ़ गए।
हाथों में तिरंगा लिए प्रदर्शनकारियों की यह भीड़ उस समय की सबसे प्रभावशाली तस्वीरों में से एक थी।

बस के आगे-पीछे चलती रही हजारों की भीड़
पुलिस के लिए हिरासत में लिए गए नेताओं को सचिवालय थाने तक ले जाना आसान नहीं था।
काफी मशक्कत के बाद बस को वीरचन्द्र पटेल पथ और आर ब्लॉक होते हुए सचिवालय थाने की ओर ले जाया गया। बस के आगे और पीछे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चलते रहे।
पुलिस बस को भीड़ से निकालने की कोशिश करती रही। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी लगातार नारे लगाते रहे।
बस जब BJP कार्यालय के सामने पहुंची तो वहां प्रदर्शन का एक और दृश्य सामने आया।
BJP कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी
BJP कार्यालय के सामने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुट गए। भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
BJP कार्यालय की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। काफी देर तक प्रदर्शनकारी वहीं नारे लगाते रहे।
इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ाना शुरू किया और बस भी आगे चली गई।
उस समय वीरचन्द्र पटेल पथ से लेकर इनकम टैक्स चौराहे तक सड़क पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। डाकबंगला से इनकम टैक्स की ओर आने वाली सड़क भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ के कारण पूरी तरह प्रभावित रही।

इनकम टैक्स की ओर फिर चला वाटर कैनन
बस के आगे बढ़ने के बाद भी प्रदर्शनकारी पूरी तरह पीछे नहीं हटे।
डाकबंगला से इनकम टैक्स की ओर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के पास जमा थे और बैरिकेड पार कर आगे आने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक बार फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल शुरू किया गया।
इस समय भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर मौजूद थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बैरिकेड के दोनों ओर दबाव बना रहा।
इस तरह मार्च के दौरान कई बार वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और प्रदर्शन लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करता रहा।
तेजस्वी ने कहा- मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है सब
वाटर कैनन चलने के बाद इनकम टैक्स चौराहे पर मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च को रोकने और वाटर कैनन चलाने की कार्रवाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इशारे पर हो रही है।
तेजस्वी यादव ने कहा:
“हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, हम जेल जाने से नहीं डरते। छात्रों के अधिकार, बेरोजगारी को कम करने, पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए आवाज उठाते रहेंगे। जनता जाग चुकी है और अब सड़कों पर है। अब सरकार को झुकना ही पड़ेगा।”

कंचन यादव ने कहा- ऐसी सरकार के लिए बिहार तैयार नहीं
इनकम टैक्स चौराहे पर RJD की राष्ट्रीय प्रवक्ता कंचन यादव ने कहा कि वाटर कैनन चलाकर शांतिपूर्ण मार्च को रोकने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा कि बिहार इस तरह की “तानाशाही” वाली सरकार के लिए तैयार नहीं है।
कंचन यादव ने कहा कि मार्च को रोके जाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि राजभवन तक पहुंचकर छात्रों और युवाओं की मांग सरकार के सामने रखने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने पेपर लीक और बिहार में भर्ती परीक्षाओं तथा वैकेंसी से जुड़े सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि सरकार अगर इस तरह की कार्रवाई से आंदोलन की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है तो यह संभव नहीं होगा।
AK-47 का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी दिखा
मार्च में सीवान की घटना को लेकर एक अलग तरह का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया गया।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने छात्रों की भूमिका में सिर पर पट्टी बांध रखी थी। उनके सामने पुलिस की भूमिका में प्रदर्शनकारी खड़े थे। पुलिस की भूमिका निभाने वाले लोगों के हाथ में AK-47 की प्रतिकृति और कटआउट दिखाई दे रहे थे।
इस प्रदर्शन के जरिए सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल के मुद्दे को सामने रखा गया।
यह दृश्य RJD के मार्च में सीवान की घटना को लेकर बने राजनीतिक माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

सीवान की घटना की पृष्ठभूमि
19 अगस्त के मार्च को समझने के लिए 25 जुलाई की सीवान घटना को उसके व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।
देश में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन कई सप्ताह से चल रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में अलग-अलग हिस्सों से छात्र शामिल हो रहे थे। आंदोलन में पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के भविष्य और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख थे।
20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च किया। बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन चलाए, लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इन कार्रवाईयों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए।
इसके बाद इस आंदोलन के समर्थन में 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया।
इसी बिहार बंद के दौरान सीवान में छात्रों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा। पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 चलाने का वीडियो सामने आया और संबंधित कांस्टेबल को निलंबित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भी छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल को अनुचित बताया था।
सीवान की घटना के बाद फायरिंग की परिस्थितियों और गोलियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। बिहार सरकार ने बाद में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि कांस्टेबल ने भीड़ में घिरने के बाद चार राउंड हवा में चलाए। वहीं वीडियो के स्वतंत्र विश्लेषण में इससे अधिक राउंड फायर होने का दावा किया गया।
इस विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का बना रहा।

तेजस्वी का सवाल: गोली चलाने की जिम्मेदारी किसकी?
सीवान की घटना के बाद तेजस्वी यादव लगातार सवाल उठा रहे हैं कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान AK-47 का इस्तेमाल क्यों हुआ और गोली चलाने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
संबंधित कांस्टेबल पर कार्रवाई हुई। लेकिन तेजस्वी का सवाल इससे आगे है।
क्या केवल हथियार चलाने वाले पुलिसकर्मी पर विभागीय कार्रवाई पर्याप्त है? या यह भी जांच होनी चाहिए कि AK-47 उस स्थिति में वहां कैसे पहुंची, पुलिस बल की तैनाती किस तरह हुई और उस समय की पूरी कमांड-चेन की भूमिका क्या थी?
19 अगस्त के मार्च में राजद ने इसी सवाल को बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रखा।
छात्र आंदोलन से RJD की दूरी और अब बड़ी राजनीतिक पहल
19 अगस्त का मार्च केवल सीवान की घटना पर प्रतिक्रिया नहीं था। इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदर्भ भी है।
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ देशभर में छात्र आंदोलन चल रहा था। दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद मार्च तक आंदोलन पहुंच चुका था। उस दौर में छात्रों के मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुखता से उभर रहे थे।
बिहार में भी इसी आंदोलन के समर्थन में 25 जुलाई को बंद हुआ। उसी दिन सीवान की घटना ने बिहार की राजनीति को नया मुद्दा दिया।
लेकिन 25 जुलाई से 19 अगस्त तक काफी समय बीत गया। इस बीच सीवान की घटना पर राजनीतिक बयानबाजी होती रही, लेकिन RJD की ओर से इतने बड़े स्तर का सड़क आंदोलन 19 अगस्त को दिखाई दिया।
क्या राजद अब उस छात्र असंतोष की राजनीतिक ऊर्जा को अपने व्यापक विपक्षी अभियान में बदलना चाहती है, जो पिछले कई सप्ताह से बिहार और देश में अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रहा है?

19 अगस्त को तेजस्वी यादव ने पहली बार इस पूरे मुद्दे को एक बड़े सड़क आंदोलन के रूप में सामने रखा। उन्होंने छात्रों के अधिकार, बेरोजगारी, पेपर लीक और परीक्षा में पारदर्शिता को सीवान की पुलिस कार्रवाई के सवाल के साथ जोड़ दिया।
उन्होंने बैरिकेड के सामने प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया। वाटर कैनन की बौछार के दौरान भी वह सबसे आगे रहे। हिरासत में लिए जाने के बाद भी आंदोलन जारी रखने की बात कही।
यह तस्वीर RJD के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
लेकिन इस प्रदर्शन का वास्तविक राजनीतिक असर केवल आज की तस्वीरों से तय नहीं होगा।
असली चुनौती अब शुरू होती है
एक बड़ा मार्च किसी आंदोलन को स्थायी राजनीतिक अभियान में नहीं बदल देता।
यदि राष्ट्रीय जनता दल वास्तव में पेपर लीक, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं और छात्रों के अधिकारों को अपना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है, तो उसे आगे लगातार सड़क पर रहना होगा।
छात्रों के बीच जाना होगा। भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े मामलों को लगातार उठाना होगा। पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही की मांग को आगे बढ़ाना होगा।
यही तय करेगा कि 19 अगस्त का मार्च केवल एक दिन का बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन था या RJD की राजनीतिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़।
थाने से रिहाई के बाद भी तेजस्वी का तेवर कायम

हिरासत के बाद तेजस्वी यादव को सचिवालय थाने ले जाया गया। शाम में रिहाई के बाद उन्होंने फिर सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों पर हुई फायरिंग में गोली चलाने की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने छात्रों के साथ न्याय, बेरोजगारी खत्म करने, पेपर लीक रोकने और परीक्षा में पारदर्शिता की मांग दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि वे जेल जाने से नहीं डरते और छात्रों तथा युवाओं के मुद्दों पर आंदोलन जारी रहेगा।
इस तरह इनकम टैक्स चौराहे पर वाटर कैनन और हिरासत के दौरान दिए गए उनके बयान से लेकर थाने से रिहाई के बाद की प्रतिक्रिया तक उनका संदेश एक ही रहा—सरकार पर दबाव बनाए रखना और छात्रों तथा युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में रखना।
19 अगस्त की पटना की तस्वीर क्या कहती है?
दिनभर के घटनाक्रम को एक साथ देखें तो तस्वीर कई स्तरों पर दिखाई देती है।
एक तरफ जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च था। दूसरी तरफ रास्ते में लगी पुलिस बैरिकेडिंग थी। बीच में तिरंगा लिए हजारों प्रदर्शनकारी थे। डाकबंगला पर बैरिकेड पार हुआ। इनकम टैक्स पर तेजस्वी यादव प्रदर्शनकारियों की अगली कतार में रहे। वाटर कैनन चला। फिर प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया।
पुलिस बस के चारों तरफ प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हुई। लोग बस की खिड़कियों से लटकते और ऊपर चढ़े दिखाई दिए। तिरंगे के साथ नारेबाजी होती रही। बस वीरचंद पटेल पथ और आर ब्लॉक होते हुए सचिवालय की ओर बढ़ी। BJP कार्यालय के सामने फिर नारेबाजी हुई। और इस दौरान इनकम टैक्स की ओर बड़ी संख्या में जमा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि 19 अगस्त का प्रदर्शन केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहा। यह पटना की सड़कों पर सरकार और मुख्य विपक्ष के बीच सीधे राजनीतिक टकराव की तस्वीर में बदल गया।
अब सवाल यह है कि इस सड़क संघर्ष के बाद बिहार की राजनीति किस दिशा में जाती है।
क्या छात्र और युवा इन मुद्दों पर लंबे आंदोलन का हिस्सा बनेंगे? क्या RJD इस आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाएगी? और क्या सीवान की घटना में जवाबदेही का सवाल किसी ठोस कार्रवाई तक पहुंचेगा?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। लेकिन 19 अगस्त ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया कि पेपर लीक, रोजगार, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के सवाल अब बिहार की राजनीति में एक बड़े विपक्षी मुद्दे के रूप में सामने आ चुके हैं।




