ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के 24वें बिहार राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को खगड़िया के के.एन. क्लब परिसर में प्रतिनिधि सत्र जारी रहा। कार्यक्रम की शुरुआत एटक की राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड अमरजीत कौर द्वारा सम्मेलन का झंडोत्तोलन करने के साथ हुई। इसके बाद शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
प्रतिनिधि सत्र में बिहार के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान मजदूरों के अधिकार, संगठन के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

जनवादी सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुई सत्र की शुरुआत
झंडोत्तोलन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद बेगूसराय (बिहट) इप्टा की सांस्कृतिक टीम ने जनवादी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कलाकारों ने मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के संघर्ष से जुड़े जनगीत प्रस्तुत किए।
गीतों के माध्यम से शोषण, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को उठाया गया। मजदूर वर्ग के जीवन और अधिकारों की लड़ाई को सांस्कृतिक प्रस्तुति के जरिए सामने रखा गया। कार्यक्रम को प्रतिनिधियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

अमरजीत कौर ने मजदूरों की चुनौतियों पर रखी बात
इसके बाद एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने प्रतिनिधि सत्र का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने अपने एक घंटे से अधिक लंबे संबोधन में देश के मजदूर वर्ग के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से बात रखी।
उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों की आलोचना की। अमरजीत कौर ने कहा कि कॉरपोरेटपरस्त नीतियों और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से मजदूरों के दशकों पुराने अधिकार कमजोर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार के स्थान पर ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे नौकरी की सुरक्षा, ट्रेड यूनियन अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।

महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर निशाना
अमरजीत कौर ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और ठेका प्रथा ने मेहनतकश वर्ग की मुश्किलें बढ़ाई हैं। सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया जा रहा है। वहीं, असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक अभी भी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं।
उन्होंने आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, मिड-डे मील रसोइयों, खेत मजदूरों और अन्य स्कीम वर्कर्स का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों से स्थायी प्रकृति का काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं दी जा रही है।
उन्होंने स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने के साथ सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के तहत अधिकार देने की मांग की।
गांव-गांव और कार्यस्थलों तक संगठन विस्तार का आह्वान
एटक की राष्ट्रीय महासचिव ने कार्यकर्ताओं से संगठन को और मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठित और असंगठित क्षेत्र के मेहनतकश श्रमिकों को एटक के झंडे तले जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और कार्यस्थलों तक संगठन का विस्तार करने का आह्वान किया। अमरजीत कौर ने कहा कि मजदूरों की एकता ही जनविरोधी और मजदूर विरोधी नीतियों का प्रभावी जवाब है। उनके अनुसार, संघर्ष के बिना श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकते।
एटक की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर
अमरजीत कौर ने एटक के इतिहास और मजदूर आंदोलन में उसके योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एटक ने देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि आठ घंटे के कार्यदिवस, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों के लिए हुए संघर्षों में एटक अग्रिम पंक्ति में रही है। उन्होंने कहा कि संगठन की इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेहनतकश जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखना होगा।

240 प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा
सम्मेलन स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रभाशंकर सिंह ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने राज्यभर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया और सम्मेलन की सफलता की कामना की।
प्रतिनिधि सत्र में राज्यभर से आए 240 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सत्र के दौरान एटक बिहार राज्य कमिटी के महासचिव अजय कुमार ने संगठन का कार्य प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
कार्य प्रतिवेदन पर 25 प्रतिनिधियों ने बहस में हिस्सा लिया। प्रतिनिधियों ने संगठन विस्तार, स्कीम वर्कर्स के आंदोलन, औद्योगिक क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने, मजदूरों के अधिकार और आगामी संघर्षों से जुड़े सुझाव दिए।
प्रतिनिधियों के सुझावों और संशोधनों को शामिल करने के बाद कार्य प्रतिवेदन को सर्वसम्मति से स्वीकृत कर लिया गया।

प्रतिनिधि सत्र गजनफ्फर नवाब, सी. सिंह, ललन कुमार और भारत झा की अध्यक्षमंडली की देखरेख में संचालित हो रहा है। सत्र के दौरान संगठन के कोषाध्यक्ष अमरनाथ ने वित्तीय प्रतिवेदन और बजट भी प्रस्तुत किया।
इस पर प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के निजीकरण तथा अन्य श्रमिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

सम्मेलन के प्रतिनिधि सत्र में विभिन्न प्रस्ताव पेश किए गए। इन प्रस्तावों पर राज्यभर से आए प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की और अपने सुझाव दिए। सुझावों को शामिल करने के बाद सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकृत किए गए।
प्रस्तावों में सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश और निजीकरण का विरोध करते हुए सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने की मांग की गई। इसके अलावा चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग भी उठाई गई।
स्कीम वर्कर्स के लिए सरकारी कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वेतन, ईएसआई, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वैधानिक सुविधाओं की मांग को भी प्रस्ताव में शामिल किया गया।
शिक्षा, पेंशन और श्रमिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठे
सम्मेलन में नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) लागू करने की मांग की गई। बेगूसराय रिफाइनरी के ठेका श्रमिकों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने और निर्माण कामगारों के पंजीकरण तथा पहचान पत्र बनाने में हो रही अनियमितताओं को दूर करने की मांग भी रखी गई।
इसके अलावा नई शिक्षा नीति वापस लेने और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन तथा श्रम मानकों को लागू करने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने और 28 सितंबर 2026 को राजभवन, पटना मार्च में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किया।




