Monday, 31 August 2026
बिहार

नागासाकी से गाजा तक: युद्ध के खिलाफ उठी आवाज, बोले- बमों के साये में बच्चों का भविष्य खतरे में

संबोधित करते डॉ सत्यजीत
संबोधित करते डॉ सत्यजीत

पटना: नागासाकी दिवस के अवसर पर रविवार को पटना में दुनिया में जारी युद्ध और उसके बच्चों पर पड़ रहे असर के खिलाफ आवाज उठाई गई। इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) और विभिन्न संगठनों की पहल पर आईएमए हॉल में ‘बमों के साये में बच्चे’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक संगठनों, महिला संगठनों, छात्र-युवा संगठनों और सांस्कृतिक कर्मियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध का सबसे गंभीर असर बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने गाजा समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष को समाप्त करने की अपील की।

नागासाकी की त्रासदी से गाजा तक

कार्यक्रम की शुरुआत इप्टा के कलाकारों ने युद्ध विरोधी गीत और कविता पाठ से की। कलाकारों ने मखदूम मुहिउद्दीन के गीत ‘जाने वाले सिपाही से पूछो’ और साहिर लुधियानवी की नज्म ‘जंग तो खुद ही एक मसला है’ प्रस्तुत की।

IDPD के राष्ट्रीय सचिव डॉ. शकील ने कहा कि 81 साल पहले परमाणु बम ने नागासाकी को तबाह कर दिया था। उस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए।

संबोधित करते डॉ शकील
संबोधित करते डॉ शकील

उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया ने दोबारा ऐसी त्रासदी नहीं होने देने की बात कही थी। इसके बावजूद आज भी दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जारी हैं। उनके अनुसार, गाजा में आम लोग भूख और तबाही का सामना कर रहे हैं।

गाजा में बच्चों की स्थिति पर जताई चिंता

चिकित्सक डॉ. सत्यजीत राय ने युद्ध के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी की जरूरत बताई। उन्होंने UNICEF के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गाजा में बड़ी संख्या में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चे लंबे समय से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इससे एक पूरी पीढ़ी शिक्षा, शिक्षक और सामान्य स्कूली जीवन से दूर हो रही है।

वहीं, डॉ. ए.के. गौड़ ने कहा कि युद्ध का बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने कुपोषण और हाइपोथर्मिया से बच्चों की मौत के आंकड़ों का भी उल्लेख किया।

कुपोषण को लेकर भी चिंता

इस्कफ की ओर से रविंद्र नाथ राय ने गाजा में खाद्य संकट की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण वहां अकाल जैसी परिस्थितियां पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

संबोधित करते रविन्द्र नाथ राय

उन्होंने बताया कि पांच साल से कम उम्र के लगभग 1.32 लाख बच्चों को एक्यूट मैलन्यूट्रिशन का खतरा था। इनमें करीब 41 हजार गंभीर मामले शामिल थे।

उन्होंने कहा कि बच्चों को भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है।

महिला और मजदूर संगठनों ने भी उठाई आवाज

बिहार महिला समाज की अध्यक्ष निवेदिता झा ने कहा कि गाजा में हजारों बच्चे मारे गए हैं। उनके स्कूल तबाह हो चुके हैं और घर मलबे में बदल गए हैं।

उन्होंने कहा कि युद्ध की तबाही केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। इसलिए युद्ध के खिलाफ लगातार आवाज उठाना जरूरी है।

एटक के महासचिव अजय कुमार ने कहा कि दुनिया एक भयावह दौर से गुजर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर युद्ध में नई पीढ़ी ही खत्म होती जाएगी तो भविष्य की दुनिया कैसी होगी।

राजनीतिक संगठनों ने युद्ध के खिलाफ आंदोलन तेज करने की अपील की

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता राम बाबू ने कहा कि युद्ध मानव सभ्यता का सबसे वीभत्स रूप है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे राजनीतिक और आर्थिक हित भी काम करते हैं।

भाकपा के जिला सचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं। उन्होंने युद्ध को पूंजीवादी व्यवस्था के हिंसक रूप से भी जोड़कर देखा।

AIPSO के वरिष्ठ नेता ने भी गाजा की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने पानी और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की बात कही।

छात्र-युवा संगठनों ने कहा- बच्चों के खिलाफ है युद्ध

AISF की ओर से वक्ता ने कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां बच्चों से उनका बचपन छीन लेती हैं।

AIYF के प्रतिनिधि ने कहा कि गाजा में युद्ध के कारण बड़ी संख्या में बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कई बच्चों के हाथ-पैर तक चले गए हैं।

प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से अनीश अंकुर ने कहा कि यह केवल युद्ध नहीं है, बल्कि बच्चों और आम लोगों के जीवन की बड़ी त्रासदी है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज मजबूत करने की जरूरत बताई।

गीत, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया शांति का संदेश

कार्यक्रम के दौरान IPTA और नट मंडप के कलाकारों ने युद्ध विरोधी गीत और कविता पाठ प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अभिनेत्री मोना झा ने किया।

इस अवसर पर रंगकर्मी विनोद कुमार, वरिष्ठ अभिनेता जावेद अख्तर, उर्दू साहित्यकार सफदर इमाम कादरी और इबराना ने कविता पाठ किया। IPTA की रूपा, सुनीता, श्वेत प्रीत और पलक ने युद्ध विरोधी गीत प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के संयोजन की जिम्मेदारी सीताराम सिंह ने संभाली।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने नागासाकी की त्रासदी से सबक लेते हुए दुनिया में शांति स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं को युद्ध और हिंसा से मुक्त भविष्य देना पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है।

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लेखक

Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार और वीडियो जर्नलिस्ट हैं। वे The Azadi (दी आज़ादी) के संस्थापक हैं। वे बिहार सहित विभिन्न जनसरोकार से जुड़े मुद्दों, राजनीति, समाज, लोकतंत्र और स्थानीय घटनाओं पर समाचार रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्ट, वीडियो कवरेज, साक्षात्कार और विश्लेषण करते हैं

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