कर्नाटक सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार से करीब 22,000 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। राज्य में अनुमानित फसल नुकसान 62,000 करोड़ रुपये बताया गया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति और किसानों को हुए नुकसान के संबंध में केंद्र सरकार को तीन ज्ञापन सौंपे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात का समय मांगा गया है, ताकि राज्य की स्थिति और राहत की जरूरतों को विस्तार से रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि मुलाकात का समय मिलता है तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्र सरकार से मुलाकात की जाएगी। अन्यथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगें रखेगा।
राजस्व मंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के दिशा-निर्देशों के तहत राहत की पात्र राशि का आकलन किया है। सरकार पूरे 62,000 करोड़ रुपये के अनुमानित फसल नुकसान की मांग केंद्र से नहीं कर सकती, इसलिए निर्धारित मानकों के अनुसार करीब 22,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी गई है।
प्रति किसान मिलेगी कुल 5,000 रुपये की सहायता
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों को पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपये देने के लिए 1,250 करोड़ रुपये जारी किए हैं। बताया गया है कि यादगिर जिले में तीन लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि राहत राशि में वृद्धि के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों को 2,500 रुपये की अतिरिक्त सहायता देने पर सहमति जताई है। इसके लिए 1,250 करोड़ रुपये की और आवश्यकता होगी। यह राशि अगले एक सप्ताह से 15 दिनों के भीतर जारी की जाएगी। इसके बाद प्रत्येक पात्र किसान को कुल 5,000 रुपये की सहायता मिलेगी।
पेयजल और जरूरी कामों के लिए भी जारी की गई राशि
सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था और अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को एक करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। वहीं, जिलों को उनकी जरूरतों के अनुसार चार से पांच करोड़ रुपये दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक को लेकर परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार ने कर्नाटक के मुद्दों पर चर्चा के लिए अलग से समय मांगा है। प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से दिल्ली या मैसूरु में मुलाकात कर सकता है।
किराया और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का किया बचाव
इस दौरान परमेश्वर ने परिवहन किराए और दूध-दही की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि राज्य के वित्तीय प्रबंधन में समाज के सभी वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखना पड़ता है। सरकार को सूखा प्रभावित किसानों, गन्ना उत्पादकों और महंगाई भत्ता पाने वाले कर्मचारियों की जरूरतों का भी ख्याल रखना होता है।
परिवहन किराया बढ़ाने के फैसले पर भाजपा की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन और कृषि लागत पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद ईंधन की कीमतों में करीब 14 बार बढ़ोतरी हुई है। किसानों को ट्रैक्टर और दूसरे कृषि कार्यों के लिए डीजल पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य की राजस्व स्थिति पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। वाणिज्यिक कर, उत्पाद शुल्क और स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्क से अच्छा राजस्व संग्रह हुआ है। सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने के बाद ही फैसले ले रही है।




