पटना: बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के समापन समारोह का आयोजन पटना स्थित बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ भवन, जमाल रोड में भव्य रूप से किया। यह समारोह न केवल एक संगठन की सौ वर्षों की यात्रा का उत्सव था, बल्कि शिक्षा, संघर्ष और शिक्षक अधिकारों के इतिहास को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवसर भी रहा।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि, अखिल भारतीय शिक्षक संघ के पदाधिकारी, बिहार विधान परिषद के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे। समारोह में बिहार के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
शताब्दी समारोह में दो ऐतिहासिक पुस्तकों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक संघ के सृजन और संघर्ष के सौ वर्षों को समेटे दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
- हिंदी में – ‘शून्य से शिखर’
- अंग्रेज़ी में – ‘Hundred Years of Struggle and Sacrifice’
इन पुस्तकों में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के गठन से लेकर आज तक की संघर्षपूर्ण यात्रा, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ विस्तार से दर्ज की गई हैं। इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताया गया।
संगठन की अध्यक्षता और कार्यक्रम संचालन
पूरे समारोह की अध्यक्षता बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने की। कार्यक्रम का संचालन अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
शत्रुघ्न प्रसाद सिंह का संबोधन
बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव एवं पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने अपने स्वागत भाषण में संगठन के संघर्षों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा—
“हमारे संगठन ने औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश शासन से संघर्ष कर शिक्षकों के लिए कई सुविधाएँ हासिल कीं। आज़ाद भारत में माध्यमिक शिक्षकों का शायद ही कोई संगठन हो, जो इतना पुराना और निरंतर संघर्षशील रहा हो।”
उन्होंने कहा कि बिहार के शिक्षकों को जो अधिकार और सुविधाएँ मिली हैं, वे लगातार आंदोलनों और कुर्बानियों का परिणाम हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संगठन को कई बार मान्यता समाप्त करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ हर तूफान में डटा रहा।
प्रो. संजय कुमार सिंह का बयान
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य प्रो. संजय कुमार सिंह ने कहा कि—
“बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ देश का एक वृहद, सशक्त और लोकतांत्रिक संगठन है। इसकी मजबूती का कारण इसका आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी संघर्ष है।”
उन्होंने कहा कि संघ के सौ वर्षों के इतिहास को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के शिक्षकों पर है। उन्होंने वर्ष 2026 में राज्यकर्मी का दर्जा, सप्तम वेतनमान, तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करने का आह्वान किया।
शिक्षकों की मांगों पर एकजुटता
कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि—
“शिक्षकों के पदनाम की एकरूपता, पूर्व सेवा के आधार पर फिटमेंट और पे-मैट्रिक्स निर्धारण जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। इस संघर्ष में हम पूरी तरह शिक्षक संघ के साथ हैं।”
अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने क्या कहा
ओडिशा माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव ब्रजकिशोर विश्वास ने बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ को अपना सहोदर संगठन बताते हुए कहा कि आज भी उनके संगठन की प्रेरणा बिहार के संघर्षों से मिलती है।
झारखंड शिक्षक महासंघ के महासचिव रविंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ आज भी झारखंड के शिक्षक आंदोलनों का पावर हाउस बना हुआ है।
आंध्र प्रदेश शिक्षक संघ के महासचिव एवं अखिल भारतीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष ए. नरसिम्हा रेड्डी ने कहा—
“यह सिर्फ शताब्दी समापन समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा के लिए सृजन और संघर्षों का उत्सव है।”
वरिष्ठ शिक्षकों का सम्मान
समारोह के दौरान शिक्षक आंदोलन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जनार्दन प्रसाद सिंह, देवीकांत राय, नूतन आनंद, यादवेश सिंह, राजेन्द्र प्रसाद, शाहज़ाफ़र इमाम, सच्चिदानंद प्रेमी सहित कई वरिष्ठ शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ का यह शताब्दी समापन समारोह न केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण था, बल्कि भविष्य के संघर्षों और संकल्पों की दिशा तय करने वाला कार्यक्रम भी साबित हुआ। यह आयोजन शिक्षक एकता, लोकतंत्र और शिक्षा के अधिकारों की मजबूती का प्रतीक बनकर उभरा।