राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान चार देशों के नवनियुक्त राजदूतों से परिचय पत्र प्राप्त किए। इनमें माली, म्यांमार, मेडागास्कर और इक्वेटोरियल गिनी के राजदूत शामिल थे। चारों राजनयिकों ने राष्ट्रपति को अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करने से संबंधित आधिकारिक परिचय पत्र सौंपे।
इस समारोह के दौरान भारत के इन चारों देशों के साथ राजनयिक संबंधों, ऐतिहासिक सहयोग और आपसी साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
माली के राजदूत ने सबसे पहले सौंपा परिचय पत्र
समारोह में सबसे पहले माली के राजदूत फटोमा थेरा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया। भारत और माली के बीच विकास सहयोग और कूटनीतिक संबंध लंबे समय से बने हुए हैं।
भारत ने मई 2009 में माली की राजधानी बमाको में अपना दूतावास स्थापित किया था। भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत ने माली को कुल 303.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सात क्रेडिट लाइनें उपलब्ध कराई हैं। इन क्रेडिट लाइनों के माध्यम से माली में विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को सहयोग मिला है।
इसके अलावा, माली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का भी समर्थन करता है। यह समर्थन दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग को दर्शाता है।
म्यांमार के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध
इसके बाद म्यांमार के राजदूत यू आये मिन हत्वे ने राष्ट्रपति मुर्मु को अपना परिचय पत्र सौंपा। भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर लंबे समय से संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क और सांस्कृतिक जुड़ाव भी द्विपक्षीय साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, म्यांमार भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह आसियान का एकमात्र ऐसा सदस्य देश है, जिसकी भारत के साथ जमीनी और समुद्री दोनों तरह की सीमाएं जुड़ी हुई हैं।
भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी म्यांमार भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाले प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है। इस वजह से दोनों देशों के बीच संपर्क, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को विशेष महत्व दिया जाता है।
मेडागास्कर में भारतीय मूल के करीब 17,500 लोग रहते हैं
मेडागास्कर की राजदूत मैंडेहात्सारा जॉर्गेट ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया। भारत और मेडागास्कर के बीच संबंध 18वीं सदी से चले आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ-साथ भारतीय समुदाय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मौजूदा समय में मेडागास्कर में भारतीय मूल के लगभग 17,500 लोग रहते हैं। इनमें अधिकांश का संबंध गुजरात से है। भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान देता रहा है।
भारत ने वर्ष 1954 में मेडागास्कर की राजधानी अंतानानारिवो में अपना वाणिज्य दूतावास यानी कॉन्सुलेट जनरल स्थापित किया था। वर्ष 1960 में मेडागास्कर को स्वतंत्रता मिलने के बाद इस कार्यालय को पूर्ण दूतावास का दर्जा दे दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों को और मजबूती मिली।
इक्वेटोरियल गिनी के साथ भी लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध
समारोह में इक्वेटोरियल गिनी के राजदूत मिगुएल एडजैंग एंग्यू ने भी राष्ट्रपति को अपना परिचय पत्र सौंपा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और इक्वेटोरियल गिनी के बीच वर्ष 1968 में उसकी स्वतंत्रता से पहले से ही मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं।
दोनों देशों ने समय के साथ अपने राजनयिक संपर्कों को विस्तार दिया है। इक्वेटोरियल गिनी ने अक्टूबर 2016 में नई दिल्ली में अपना स्थायी राजनयिक मिशन स्थापित किया था। इसके बाद भारत ने मार्च 2019 में इक्वेटोरियल गिनी की राजधानी मलाबो में अपना राजनयिक मिशन शुरू किया।
इस तरह दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां स्थायी राजनयिक प्रतिनिधित्व स्थापित कर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में चारों देशों के राजदूतों द्वारा परिचय पत्र सौंपना भारत के साथ उनके औपचारिक राजनयिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा रहा।




