Friday, 6 November 2026
अंतरराष्ट्रीय

कॉमनवेल्थ कबड्डी में गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य रहीं बीहट की रिया, बेगूसराय में हुआ भव्य स्वागत

बिहार के बेगूसराय जिले के बीहट की बेटी रिया कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय देते हुए जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इस विजेता टीम की सदस्य रहीं रिया कुमारी के बेगूसराय लौटने पर गुरुवार, 5 नवंबर को भव्य स्वागत किया गया। सिमरिया गोलंबर से लेकर जीरोमाइल दिनकर गोलंबर तक विभिन्न चौक-चौराहों पर लोगों ने फूल-मालाओं, बैंड-बाजे और पुष्पवर्षा के साथ उनका अभिनंदन किया।

रिया के स्वागत को लेकर पूरे इलाके में उत्साह का माहौल रहा। मल्हीपुर चौक पर आकाशगंगा कला जत्था, बीहट चांदनी चौक पर मध्य विद्यालय बीहट तथा रामजानकी मंदिर चौक पर वैदेही वल्लभ बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं और छात्र-छात्राओं ने कतारबद्ध होकर फूलों की वर्षा से उनका स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने ‘पग-पग माटी चंदन है, बिटिया रिया तेरा अभिनंदन है’ के नारे लगाकर अपनी खुशी जाहिर की। बाद में जीरोमाइल स्थित होटल युवराज परिसर में आयोजित समारोह में रिया और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।

भारतीय महिला टीम ने जीता स्वर्ण पदक, रिया ने किया बिहार का प्रतिनिधित्व

अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस टीम में बेगूसराय के बीहट की रिया कुमारी भी शामिल थीं। रिया ने लेफ्ट कॉर्नर खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और टीम की स्वर्णिम उपलब्धि का हिस्सा बनीं।

रिया की इस उपलब्धि से बेगूसराय के खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों में खुशी है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचने वाली रिया की सफलता को क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

2015 में गांव की जमीन से शुरू हुआ कबड्डी का सफर

रिया कुमारी बेगूसराय जिले के बीहट नगर परिषद के वार्ड संख्या 29 स्थित जागीर टोला रतन चौक की रहने वाली हैं। उनके पिता सिकंदर कुमार किसान हैं, जबकि माता वैजयंती देवी गृहिणी हैं।

रिया ने वर्ष 2015 में अपने गांव की जमीन से कबड्डी खेलने की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों और सामाजिक तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उनका ध्यान लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने और आगे बढ़ने पर रहा।

बीहट गर्ल्स स्कूल के मैदान में सीनियर महिला खिलाड़ियों के साथ अभ्यास कर उन्होंने कबड्डी की बारीकियां सीखीं। लगातार मेहनत और अभ्यास के दम पर उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। धीरे-धीरे उनका चयन भारतीय टीम के लिए हुआ और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

रिया ने कहा- लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत करें

अपने स्वागत और सम्मान समारोह के दौरान रिया कुमारी ने युवाओं और खासकर लड़कियों को मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत करें, एक न एक दिन सफलता मिलनी तय है।”

रिया ने अपने कबड्डी सफर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि बीहट कबड्डी के लिए एक नर्सरी की तरह है। यहां से कई लड़कियों ने इस खेल के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है और सरकारी नौकरी भी हासिल की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय स्पोर्टिंग क्लब बीहट के चेयरमैन श्याम नंदन सिंह पन्नालाल, बिहार राज्य कबड्डी संघ के चेयरमैन कुमार विजय सहित अन्य सहयोगियों और मार्गदर्शकों को दिया।

ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलने की जरूरत

रिया की उपलब्धि पर स्थानीय ग्रामीणों में भी उत्साह है। ग्रामीण राकेश कुमार ने कहा कि बीहट की बेटी की इस सफलता से पूरे गांव और बेगूसराय जिले में खुशी का माहौल है। रिया ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता से गांव की दूसरी लड़कियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत है कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इससे गांवों से भी कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकेंगे।

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना अगला लक्ष्य

कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय महिला टीम की स्वर्णिम सफलता का हिस्सा बनने के बाद रिया कुमारी का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतना है।

रिया फिलहाल बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत हैं और खेल प्राधिकरण, पटना में प्रतिनियुक्त हैं। खेल के प्रति उनका समर्पण और लगातार आगे बढ़ने का जज्बा उनके सफर को खास बनाता है।

बीहट की रिया कुमारी की कहानी उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, अवसर और लगातार मेहनत से गांव की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।

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