Thursday, 5 November 2026
अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश में 30 हजार टका वेतन की मांग पर भड़के कपड़ा मजदूर, हिंसक प्रदर्शन में 50 घायल; 200 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद

ढाका, बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है। न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग को लेकर हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। सावार, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच झड़पें हुईं। इस हिंसा में पुलिसकर्मियों, मजदूरों और राहगीरों सहित करीब 50 लोग घायल हो गए। तनावपूर्ण स्थिति के चलते सावार और आशुलिया में 200 से अधिक कपड़ा फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मजदूरों का विरोध कई औद्योगिक इलाकों में फैल गया है। प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर सड़कों को जाम कर दिया, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की तीन प्लाटून भी सावार और आशुलिया में तैनात की गई हैं।

सावार में पुलिस और मजदूरों के बीच हिंसक झड़प

प्रदर्शन के दौरान हिंसा की शुरुआत सावार के हेमायतपुर स्थित पद्मा मोड़ इलाके से हुई। इसके बाद तनाव उलाइल इलाके तक फैल गया। यहां अल-मुस्लिम ग्रुप की फैक्ट्री के सामने मजदूरों और पुलिस के बीच टकराव हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंके। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले, साउंड ग्रेनेड और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर झड़प हुई।

बांग्लादेशी अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ के अनुसार, हिंसा के दौरान सावार मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (ओसी) की गाड़ी में आग लगा दी गई। ढाका जिले की पुलिस अधीक्षक शमीमा परवीन ने बताया कि घटना में पुलिसकर्मियों, मजदूरों और राहगीरों समेत कम से कम 50 लोग घायल हुए हैं। सावार मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी सैफुल आलम को भी गंभीर चोटें आई हैं।

ढाका-अरिचा हाईवे जाम, हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे

मजदूर अपनी वेतन संबंधी मांगों को लेकर पद्मा मोड़ के पास एकत्र हुए थे। उन्होंने सड़क जाम कर दिया। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की तो टकराव शुरू हो गया, जो बाद में आसपास के इलाकों तक फैल गया।

प्रदर्शनकारियों ने ढाका-अरिचा हाईवे को दोनों तरफ से जाम कर दिया। इससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस अधीक्षक शमीमा परवीन के मुताबिक, इलाके में दोनों तरफ करीब 30 हजार से 40 हजार मजदूर जमा हो गए थे।

हिंसा और तनाव के कारण हेमायतपुर, उलाइल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की कई फैक्ट्रियों ने छुट्टी घोषित कर दी। सावार और आशुलिया में 200 से अधिक फैक्ट्रियों के बंद होने से कपड़ा उद्योग का कामकाज प्रभावित हुआ है।

गाजीपुर में भी मजदूरों का प्रदर्शन, हाईवे पर यातायात ठप

सावार के अलावा गाजीपुर में भी मजदूरों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। बुधवार सुबह कपड़ा उद्योग के मजदूरों ने गाचा इलाके के साइनबोर्ड के पास ढाका-मयमनसिंह हाईवे जाम कर दिया। इससे इस मार्ग पर यातायात बाधित हो गया।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 2,000 से 4,000 मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए। गतिरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंके। इसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया।

12,500 से बढ़ाकर 30 हजार टका वेतन करने की मांग

कपड़ा मजदूरों की सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम मासिक वेतन को मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करना है। मजदूरों का कहना है कि महंगाई और जीवनयापन की लगातार बढ़ती लागत के बीच मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उनका तर्क है कि बढ़ती कीमतों के अनुरूप वेतन में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

वेतन बढ़ाने के अलावा मजदूरों ने कई अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें प्रत्येक कपड़ा फैक्ट्री में राशन की सुविधा शुरू करना, ट्रेड यूनियन के अधिकारों की रक्षा करना और मनमाने तरीके से कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर रोक लगाना शामिल है।

मजदूरों ने कर्मचारियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रथा बंद करने और मृतक मजदूरों को न्याय दिलाने की भी मांग उठाई है।

फिलहाल बांग्लादेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है। मजदूरों के प्रदर्शन, पुलिस के साथ टकराव और बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों के बंद होने से देश के महत्वपूर्ण कपड़ा उद्योग पर असर पड़ रहा है।

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