मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। मुलाकात के बाद विपक्षी नेताओं ने बताया कि राष्ट्रपति ने कथित वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे हैं। नेताओं के मुताबिक, गठबंधन इस संबंध में दस्तावेज और जानकारी जुटाकर राष्ट्रपति को सौंपेगा।
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली के विजय चौक पर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई। इसके बाद दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत विपक्ष के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।
राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन, चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी गठबंधन पिछले चार दिनों से वोट चोरी के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इसी आंदोलन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखने के लिए प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की।
खड़गे के मुताबिक, नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और उनसे चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल की बातें ध्यान से सुनीं और कथित वोट चोरी से जुड़े सबूत मांगे हैं।
खड़गे ने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता संबंधित जानकारियां और सबूत तैयार कर रहे हैं, जिन्हें जल्द राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी दोहराई।
राहुल गांधी बोले- राष्ट्रपति ने आरोपों से इनकार नहीं किया

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने चुनाव में कथित धांधली और वोट चोरी से जुड़े मुद्दे राष्ट्रपति के सामने रखे। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने उनकी बातों को सुना और आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने के लिए कहा।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के पास इस संबंध में जानकारी और सबूत हैं, जिन्हें राष्ट्रपति के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र से जुड़े सवालों पर विपक्ष अपनी बात आगे भी उठाता रहेगा।
राहुल गांधी ने 2024 के आम चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि चुनाव में धांधली हुई थी। हालांकि, ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। राष्ट्रपति द्वारा कथित वोट चोरी के आरोपों को सही ठहराए जाने की पुष्टि करने वाला कोई बयान इन नेताओं के हवाले से सामने नहीं आया है। राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद राष्ट्रपति के रुख की अपनी व्याख्या मीडिया के सामने रखी।
ममता बनर्जी ने बताया सकारात्मक मुलाकात
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया।
ममता बनर्जी के मुताबिक, राष्ट्रपति ने मामले का विवरण देखने और सबूत भेजने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन इस संबंध में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।
ममता बनर्जी ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर एकजुट है और आगे भी अपनी मांगें उठाता रहेगा।
ज्ञापन में कौन-सी चार प्रमुख मांगें रखीं?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, INDIA गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति को सौंपे गए चार सूत्री ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग।
- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रोकने की मांग।
- चुनाव में EVM के बजाय बैलेट पेपर दोबारा लागू करने की मांग।
- पिछले दो वर्षों में हुए चुनावों की समीक्षा करने की मांग।
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। गठबंधन ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
2 अक्टूबर से शुरू हुआ विरोध, दिल्ली में लगातार प्रदर्शन
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला 2 अक्टूबर से तेज हुआ। इस दिन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके बाद छात्र संगठनों, युवा समूहों और विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई।
4 अक्टूबर को राहुल गांधी ने भी अलग से विरोध का आह्वान किया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है और चुनाव आयोग को इस संबंध में जवाब देना चाहिए। चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
6 अक्टूबर: चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च
6 अक्टूबर को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी नेताओं की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और SIR से संबंधित विवादों पर जवाबदेही तय हो।
पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया और राहुल गांधी समेत कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
7 अक्टूबर: जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश
7 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने अपना विरोध जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और दूसरे विपक्षी नेताओं को लेकर हिरासत की खबरें सामने आईं।
विपक्षी दलों ने कहा कि वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाब मिलने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
8 अक्टूबर: राजघाट पर धरना और मौन प्रार्थना
8 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित की और मौन प्रार्थना की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और कथित वोट चोरी के मुद्दे को फिर उठाया गया।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य नेताओं ने संकेत दिया कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों पर जवाबदेही की मांग की।
9 अक्टूबर: विजय चौक से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा मामला
9 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इसके बाद वे विजय चौक की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद नेताओं ने वहीं बैठकर प्रदर्शन किया।
इसी दौरान दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। इस तरह 2 अक्टूबर से दिल्ली में जारी विरोध का एक प्रमुख चरण राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक और ज्ञापन सौंपने के रूप में सामने आया।
SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर क्यों उठा विवाद?
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन किया जाता है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हट सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना रहा है कि उसके फैसले वैधानिक प्रक्रियाओं और कानून के अनुरूप होते हैं। आयोग ने संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आने को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। भाजपा ने भी विपक्ष के राजनीतिक पक्षपात संबंधी आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर दस्तावेजी तथ्यों, संबंधित पक्षों के जवाब और कानूनी प्रक्रिया की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
अब सबूत सौंपने और आगे की रणनीति पर नजर
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद INDIA गठबंधन के नेताओं ने कहा कि वे कथित वोट चोरी से जुड़े सबूत और अन्य जानकारियां राष्ट्रपति को सौंपेंगे। विपक्ष की आगे की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत करता है और इसके बाद संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR रोकने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर राजनीतिक विवाद जारी है। 2 अक्टूबर से प्रदर्शनों के जरिए शुरू हुआ विरोध 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में सबूत पेश किए जाने, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और विपक्ष के अगले कार्यक्रमों पर नजर रहेगी।




