पटना गर्ल्स हॉस्टल कांड: CPI ने CBI जांच की मांग की, बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल!

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पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की नाबालिग छात्रा के साथ हुई कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए CPI का प्रतिनिधिमंडल जहानाबाद पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल में ओम प्रकाश नारायण, सुरेंद्र सौरभ, सुरेश प्रसाद (जिला पार्टी नेता), अंबिका प्रसाद, गिरिजा नंदन सिंह, रणधीर पासवान एवं गणेश प्रसाद शामिल थे। पीड़ित परिवार से मिलाकात के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश नारायण ने The Azadi से बातचीत में कहा कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि बिहार की ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था का प्रतीक है।

“अगर आंदोलन नहीं होता तो केस दबा दिया जाता”

ओम प्रकाश नारायण ने आरोप लगाया कि शुरुआत में इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा,

“अगर सड़क पर आवाज़ नहीं उठती, तो यह मामला पूरी तरह रफा-दफा कर दिया जाता। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष ज़रूरी हो गया है।”

नाबालिग होने के बावजूद उम्र में हेरफेर का आरोप

CPI नेता के अनुसार पीड़िता की वास्तविक उम्र 17 वर्ष थी, लेकिन प्राथमिकी में उसे 18 वर्ष दिखाया गया, ताकि POCSO एक्ट से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि यह केवल काग़ज़ी हेराफेरी नहीं, बल्कि अपराधियों को बचाने की साजिश का हिस्सा है।

“पुलिस की भूमिका बेहद संदिग्ध”

सीपीआई नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ पुलिस पदाधिकारियों और हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
उनका कहना है कि:

  • निजी अस्पताल में गलत रिपोर्ट बनवाने का प्रयास हुआ
  • स्थानीय थाना स्तर पर मामला दबाने की कोशिश की गई
  • गरीब परिवार होने के कारण पीड़ित पक्ष को डराया-धमकाया गया

उन्होंने साफ कहा,

“आज बिहार में पुलिस जनता की सुरक्षा के बजाय सत्ता और पैसे के लिए काम कर रही है।”

इस घटना के बाद पटना में रहकर पढ़ाई कर रही छात्राओं और उनके परिजनों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

CPI की प्रमुख मांगें

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इस मामले में सरकार से कई ठोस मांगें रखी हैं:

  • पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा
  • पूरे मामले की CBI से जांच
  • दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
  • पटना के सभी हॉस्टलों की सुरक्षा और जांच
  • आंदोलन करने वालों पर दर्ज मुकदमे वापस
  • पीड़ित परिवार को स्थायी सुरक्षा

“यह केवल एक केस नहीं, व्यवस्था पर सवाल है”

CPI ने कहा कि यह मामला किसी एक हॉस्टल या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि डबल इंजन सरकार में भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं

Posted by The Azadi