पूर्व IAS कन्नन गोपीनाथन कांग्रेस में शामिल — कहा, “देश को सही दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी अब कांग्रेस की”

नई दिल्ली। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध के बाद चर्चाओं में आए पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन आज कांग्रेस में शामिल हो गए। दिल्ली में आज सुबह करीब 11:30 बजे पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। इस दौरान कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और पवन खेड़ा भी मौजूद थे।

कन्नन गोपीनाथन को देशभर में लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साहसी पैरोकार के रूप में देखा जाता है। वहीं, दक्षिणपंथी समर्थक सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें “राष्ट्रविरोधी” बताकर निशाने पर भी लिया था।


क्यों दिया था इस्तीफ़ा?

कन्नन गोपीनाथन ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और संचार प्रतिबंध (communication ban) के विरोध में IAS सेवा से इस्तीफ़ा दे दिया था।
उनका यह निर्णय उस दौर में लोकतांत्रिक असहमति की प्रतीकात्मक आवाज़ बन गया। उन्होंने कहा था—

“सरकार को अनुच्छेद 370 हटाने का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को प्रतिक्रिया देने का अधिकार भी है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी का दमन अस्वीकार्य है।”

इस बयान के बाद उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खूब जगह मिली, और वह एक सामान्य अफसर से लोकतांत्रिक प्रतिरोध का चेहरा बन गए।

कांग्रेस में शामिल होने पर क्या कहा?

कन्नन गोपीनाथन ने पार्टी में शामिल होने के बाद कहा—

“मैंने 2019 में इस्तीफा दे दिया था क्योंकि साफ था कि सरकार जिस दिशा में देश को ले जाना चाहती है, वह गलत है।
मैंने देशभर में यात्रा की, लोगों से बात की, और समझा कि केवल कांग्रेस पार्टी ही भारत को उस दिशा में ले जा सकती है, जिस दिशा में उसे जाना चाहिए।”

पार्टी सूत्रों के अनुसार, गोपीनाथन का शामिल होना कांग्रेस के लिए एक “संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई को मजबूत करने वाला कदम” माना जा रहा है। इससे पार्टी को केरल और कश्मीर जैसे राज्यों में वैचारिक समर्थन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।


कौन हैं कन्नन गोपीनाथन?

कन्नन गोपीनाथन 2012 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने अरुणाचल प्रदेश–गोवा–मिज़ोरम–दादरा और नगर हवेली (AGMUT) कैडर से सेवा शुरू की थी।
उन्होंने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में बिजली, शहरी विकास जैसे विभागों में अहम पदों पर काम किया।

इस्तीफे के बाद उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाई। देशभर में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संगठनों में उन्होंने संविधान, नागरिक अधिकार और लोकतंत्र पर व्याख्यान दिए।

अप्रैल 2020 में केंद्र सरकार ने उन्हें ड्यूटी पर लौटने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने नौकरी दोबारा नहीं ज्वाइन की और तब से एक एक्टिविस्ट और पब्लिक इंटेलेक्चुअल के रूप में सक्रिय हैं।

Posted by The Azadi