भारत के प्रख्यात इतिहासकार रामशरण शर्मा (R.S. Sharma) ने आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन को एक नई दृष्टि दी। उन्होंने इतिहास को “मिथकों और गाथाओं” की परंपरागत व्याख्याओं से बाहर निकालकर समाज, अर्थव्यवस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषित किया। उनकी पुण्यतिथि पर स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक कुमार ने बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव अनीश अंकुर से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में न केवल शर्मा के व्यक्तित्व और विचारों पर प्रकाश डाला गया, बल्कि भारतीय इतिहास लेखन पर उनके गहरे प्रभाव को भी रेखांकित किया गया।
आर. एस. शर्मा का व्यक्तित्व और विचारधारा
रामशरण शर्मा का जन्म 1919 में बिहार के बरौनी (जिला बेगूसराय) में हुआ था। वे इतिहास लेखन में मार्क्सवादी दृष्टिकोण से गहरे प्रभावित थे और मानते थे कि इतिहास की व्याख्या केवल राजाओं, युद्धों और गाथाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें आम जनता के जीवन, उनकी सामाजिक संरचना और आर्थिक हालात को भी जगह मिलनी चाहिए।
अनीश अंकुर के अनुसार, शर्मा ने भारतीय इतिहास की “गौरवमयी” और “मिथकीय” व्याख्याओं का खंडन करते हुए वैज्ञानिक आधार पर इतिहास लिखा। यही कारण है कि वे अक्सर दक्षिणपंथी शक्तियों के निशाने पर भी रहे।
आर. एस. शर्मा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने भारतीय इतिहास को मिथकों और गाथाओं से अलग कर वैज्ञानिक आधार पर प्रस्तुत किया।
- उन्होंने दिखाया कि प्राचीन भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक विषमता कैसे विकसित हुई।
- उनकी किताब शूद्रों का प्राचीन इतिहास ने जाति-व्यवस्था पर बहस को नई दिशा दी।
अकादमिक और संस्थागत योगदान
- शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के प्रमुख रहे।
- वे आईसीएचआर (Indian Council of Historical Research) के पहले अध्यक्ष बने।
- उन्होंने इतिहासकारों की पूरी एक पीढ़ी तैयार की, जिसने इतिहास को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से समझने की परंपरा को आगे बढ़ाया।
अनीश अंकुर की टिप्पणी
अनीश अंकुर ने बातचीत में कहा कि “रामशरण शर्मा ने इतिहास लेखन को लोकतांत्रिक बनाया। उन्होंने यह बताया कि इतिहास केवल शासक वर्ग का नहीं होता, बल्कि समाज के हर तबके के जीवन को समझे बिना इतिहास अधूरा है।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शर्मा ने अपने जीवनभर तर्क, विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व दिया और हर तरह की अंधभक्ति या अतिशयोक्ति का विरोध किया।
आज की प्रासंगिकता
आज जब भारतीय इतिहास को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस चल रही है, शर्मा की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
- उन्होंने बताया कि इतिहास का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे सच्चाई और प्रमाणों के आधार पर लिखा जाना चाहिए।
- उनकी दृष्टि आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो भारतीय समाज की जटिलताओं को समझना चाहते हैं।
रामशरण शर्मा भारतीय इतिहास लेखन के ऐसे स्तंभ रहे, जिन्होंने इतिहास को नई दिशा दी। उनके बिना आज की भारतीय इतिहास-चर्चा की कल्पना अधूरी है।