लोकसभा के शीतकालीन सत्र में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार में चल रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। उन्होंने गरीबों, दलितों और छोटे दुकानदारों के घर-दुकानों पर हो रही बेरहमीपूर्ण कार्रवाई को अत्याचार करार दिया।
प्रभावित इलाकों का दौरा
लोकसभा में मुद्दा उठाने से पहले पप्पू यादव ने नालंदा के राहुई प्रखंड में शिवनंदन नगर का दौरा किया, जहां अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर चलाए गए थे। उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासन को चेतावनी दी कि 5 दिसंबर को अगर फिर घर तोड़े गए तो उनकी लाश पर बुलडोजर चलेगा। बेगूसराय में भी महादलित बस्ती उजड़ने की घटना के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों का दौरा कर राहुल गांधी के निर्देश का हवाला देते हुए सदन में मामला उठाने की बात कही।
सदन में उठाए गए मुद्दे
संसद में बोलते हुए पप्पू यादव ने पूर्णिया, नालंदा, बेगूसराय, पटना, पाटलीपुत्रा, डुमरांव, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और दरभंगा जैसे जिलों में हो रही तोड़फोड़ का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्णिया के अरोरा गुहा का उदाहरण दिया, जहां 150 दलित परिवार पीढ़ियों से बसे हैं, सड़क बनी हुई है, बिजली बिल भरा जाता है और इंदिरा आवास भी मिल चुके हैं, फिर भी बिना नोटिस या पुनर्वास के उजाड़ दिया गया। बेगूसराय में लाठीचार्ज और महिलाओं-बुजुर्गों पर अत्याचार का भी उल्लेख कर कहा कि यह संगठित पैटर्न है।
मांगें और चेतावनी
पप्पू यादव ने मांग की कि गरीबों को 5 डिस्मिल जमीन, शहरों में दुकानें और पुनर्वास की व्यवस्था के बिना कोई कार्रवाई न हो। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की और कहा कि छह-छह पुश्तों से बसे लोगों को अवैध बताकर उजाड़ना न्याय नहीं, अत्याचार है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने का ऐलान भी किया।