Friday, 6 November 2026
अंतरराष्ट्रीय

डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी तेजी, 56 पैसे मजबूत होकर 93.91 पर बंद

भारतीय रुपए ने शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शानदार मजबूती दर्ज की। रुपया 56 पैसे की बढ़त के साथ 93.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.47 प्रति डॉलर के स्तर पर था। 12 अक्टूबर के बाद रुपए की यह सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त रही।

कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा ने छह महीने का उच्चतम स्तर भी छुआ। इस सप्ताह रुपए में करीब 1.2 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई, जिसके साथ यह एशिया की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया।

विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन

बाजार प्रतिभागियों के मुताबिक, रुपए में तेजी की प्रमुख वजह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से लगातार निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही।

विदेशी निवेशकों के निवेश से भारतीय बाजार में रुपए की मांग बढ़ी। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद बनी। इन दोनों कारकों ने घरेलू मुद्रा को मजबूती दी।

बाजार डीलरों ने बताया कि विदेशी बैंक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से सक्रिय रूप से डॉलर बेच रहे थे। डॉलर की इस बिकवाली से भी रुपए को समर्थन मिला।

आरबीआई की डॉलर खरीदारी से तेजी पर लगा अंकुश

कारोबार के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 93.88 प्रति डॉलर के आसपास डॉलर खरीदते हुए देखा गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक की इस गतिविधि से रुपए में अत्यधिक तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिली।

शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया मजबूत होकर 94.04 प्रति डॉलर के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा। यह स्तर आखिरी बार करीब 12 अक्टूबर को देखा गया था।

सालभर में अब भी कमजोर हुआ है रुपया

हालिया तेजी के बावजूद लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय रुपया अब भी कमजोर स्थिति में है। कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक इसमें करीब 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पिछले एक साल के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5.6 प्रतिशत कमजोर हुआ है।

हालांकि, चालू वित्त वर्ष में भारतीय मुद्रा ने करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। इससे हाल के कारोबारी सत्रों में रुपए की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं।

एशिया की अन्य मुद्राओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय रुपए ने एशिया की अन्य सभी प्रमुख मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन किया है। 12 अक्टूबर के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी तेजी के साथ यह छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।

विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी निवेश के भारी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपए को मजबूती मिली। इसके अलावा, घरेलू शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े निवेश को लेकर बढ़ती चर्चा और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में कमी ने भी बाजार का उत्साह बढ़ाया।

आगे रुपए की चाल कैसी रह सकती है?

बाजार विशेषज्ञों ने निकट अवधि में रुपए के कारोबार को लेकर 93.50 प्रति डॉलर का सपोर्ट और 94.30 प्रति डॉलर का रेजिस्टेंस स्तर बताया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में विदेशी निवेश का प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर की वैश्विक स्थिति भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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