हिरोशिमा दिवस के अवसर पर आज पटना में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक विमर्श का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय शांति और एकजुटता संगठन (AIPSO) और भारतीय सांस्कृतिक सहयोग व मैत्री संघ (इस्कफ) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। आयोजन का मुख्य विषय था — “साम्राज्यवाद और विश्व युद्ध के खतरे”।
इस मौके पर पटना के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन AIPSO की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य जयप्रकाश ने किया।
साम्राज्यवाद और युद्ध के अंतर्संबंध पर जोर
सामाजिक कार्यकर्ता अरुण मिश्रा ने कहा, “साम्राज्यवाद युद्ध के बिना जीवित नहीं रह सकता। अमेरिका ने युगोस्लाविया, इराक, लीबिया और सीरिया जैसे देशों को अपने युद्ध नीतियों का शिकार बनाया है। आज नवउदारवादी देश खुद टैरिफ लगा रहे हैं, जबकि पहले वे मुक्त बाज़ार की बात करते थे।” उन्होंने कहा कि आज अमेरिका की वैश्विक प्रभुता पहले जैसी नहीं रही।
पटना विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. शेफाली राय ने अपने वक्तव्य में कहा, “आज हम डर्टी वॉर के दौर से गुजर रहे हैं। युद्ध हुआ तो शायद कोई शोक मनाने वाला भी नहीं बचेगा। भोगवाद की प्रवृत्ति इतनी हावी हो चुकी है कि हम खुद को खत्म कर लेंगे लेकिन मशीनें और फ्रिज सलामत रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि “युद्ध की शुरुआत मानव मस्तिष्क की वर्चस्ववादी प्रवृत्ति से होती है।”
लोक प्रशासन विभाग के प्राध्यापक सुधीर कुमार ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के ऐतिहासिक प्रसंग को याद करते हुए कहा, “दुनिया में अब इतने परमाणु हथियार हैं कि पृथ्वी को पाँच बार नष्ट किया जा सकता है। आज के नवसाम्राज्यवादी देश आर्थिक और राजनीतिक नियंत्रण की नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।”
ऐतिहासिक और समसामयिक संदर्भ

AIPSO के राज्य महासचिव रामबाबू कुमार ने बीसवीं सदी में हुई विश्व युद्धों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रोशनी डालते हुए कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध महामंदी के बाद शुरू हुआ। अमेरिका और इंग्लैंड चाहते थे कि हिटलर सोवियत संघ पर हमला करे, लेकिन स्टालिन के नेतृत्व में जर्मनी को हार मिली।” उन्होंने बताया कि “आज का साम्राज्यवाद अधिक खतरनाक है क्योंकि यह वैश्विक कॉरपोरेट पूंजीवाद के रूप में मौजूद है।”
युद्ध और मानवीय पीड़ा
इस्कफ के राज्य महासचिव रवीन्द्र नाथ राय ने 38 साल पहले चेकोस्लोवाकिया की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा, “वहां मैंने हिरोशिमा पर बम गिराए जाने के समय की एक बच्ची की तस्वीर देखी थी। यह तस्वीर आज भी मुझे युद्ध की विभीषिका की याद दिलाती है। दुनिया के किसी न किसी कोने में युद्ध जारी है और लगभग हर युद्ध में अमेरिका की भूमिका होती है।”
अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवसागर शर्मा ने कहा, “साम्राज्यवाद के कारण मानवता का विनाश हो रहा है। युद्ध मुनाफे और शोषण की राजनीति का नतीजा है।” उन्होंने ज़ोर दिया कि “धन और सत्ता की लालसा को युद्ध का कारण नहीं बनने देना चाहिए।”
कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति

कार्यक्रम की अध्यक्षता इस्कफ के आनंद शर्मा ने की। इस अवसर पर विपिन कुमार, गौतम गुलाल, जितेंद्र कुमार, सुनील सिंह, रामजी यादव, रमेश सिंह, शगुफ्ता रशीद, अनीश अंकुर, सुशील उमाराज, मनोज प्रभाकर, मंगल पासवान, सुजीत पासवान, खुशबु कुमारी, रौशन, मनोज कुमार, भोला पासवान, प्रिंस, राखी वर्मा पंकज, आनंद, अनूप कुमार, राहुल रंजन, ओम प्रकाश, रोहित समेत अन्य अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं विचारक मौजूद थे।