अखिल भारतीय शांति व एकजुटता संगठन (AIPSO) और भारतीय सांस्कृतिक सहयोग व मैत्री संघ (इसकफ) की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के कथित हिंसक अपहरण तथा लैटिन अमेरिकी देशों पर दो सौ साल पुराने मुनरो डॉक्ट्रिन लागू कर धमकाने के खिलाफ पटना में एक प्रतिवाद मार्च निकाला गया।
यह मार्च बी.एम. दास रोड स्थित मैत्री शांति भवन से शुरू होकर रमना रोड होते हुए पटना कॉलेज गेट तक पहुंचा, जहां यह एक सभा में तब्दील हो गया। मार्च में पटना के बड़ी संख्या में नागरिक, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और रंगकर्मी मौजूद थे। पूरे कार्यक्रम का संचालन ऐप्सो के पटना जिला सचिव भोला शर्मा ने किया।
प्रतिवाद मार्च में गूंजे नारे
मार्च के दौरान
‘युद्ध नहीं शांति चाहिए’,
‘निकोलस मदुरो और सीलिया फ्लोरेस को रिहा करो’,
‘अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’,
‘इंकलाब जिंदाबाद’
और
‘लैटिन अमेरिकी देशों में मुनरो डॉक्ट्रिन लागू करना बंद करो’
जैसे नारे गूंजते रहे।

अमेरिकी प्रतिबंधों और अपहरण पर तीखी प्रतिक्रिया
ऐप्सो के राज्य महासचिव सर्वोदय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वेनेजुएला पिछले पच्चीस वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों को झेल रहा है। उन्होंने कहा,
“वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण करना पूरी दुनिया के सामने एक खतरनाक चुनौती है। डोनाल्ड ट्रंप की इस हिंसक कार्रवाई का विरोध आज पूरी दुनिया, यहां तक कि खुद अमेरिका में भी हो रहा है। हम सभी भारतवासियों का कर्तव्य है कि इस घटना के विरोध में आगे आएं।”
मुनरो डॉक्ट्रिन आज भी अमेरिका की नीति: शिक्षाविद
शिक्षाविद रौशन प्रकाश ने मुनरो डॉक्ट्रिन की चर्चा करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका आज भी 1823 के मुनरो डॉक्ट्रिन से संचालित होता है।
उन्होंने कहा कि इस डॉक्ट्रिन के अनुसार लैटिन अमेरिका को अमेरिका अपना पिछवाड़ा मानता है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा, कोलंबिया, मैक्सिको और ब्राजील में भी वेनेजुएला जैसी कार्रवाई करने की धमकी दी है। यहां तक कि ग्रीनलैंड और ईरान पर कार्रवाई की बात भी की जा रही है।
उनके अनुसार अमेरिका आज पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर उल्लंघन का आरोप
सांस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के देशों के बीच संबंधों को लेकर बनी आपसी सहमतियों का भी अमेरिका द्वारा हनन किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पंद्रह में से तेरह देशों ने अमेरिका की कार्रवाई का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका भले ही मादुरो का अपहरण कर ले, लेकिन वहां की सेना और जनता एकजुट है और झुकने को तैयार नहीं है। वेनेजुएला पर हमले का असली कारण वहां की तेल संपदा और समाजवादी विकास मॉडल है।
तेल और समाजवादी मॉडल अमेरिका के निशाने पर
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई में सौ से अधिक लोग मारे गए, जिनमें क्यूबा के बत्तीस नागरिक भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि क्यूबा पूरे लैटिन अमेरिका में समाजवादी विकास का मॉडल बन चुका है और इसी कारण वह अमेरिका के निशाने पर है। अमेरिका की नजर वेनेजुएला की अपार तेल संपदा पर है, जिसे वह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में इस्तेमाल करना चाहता है।
भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पटना जिला सचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि भारत सरकार को अमेरिका की हिंसक कार्रवाई का विरोध करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि भारत कभी गुटनिरपेक्ष देशों का नेता रहा है, लेकिन आज डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार अपमान के बावजूद भारत सरकार चुप्पी साधे हुए है।
उनका कहना था कि भारत को हमेशा उन देशों के साथ खड़ा होना चाहिए जिनके साथ अन्याय होता है।
अमेरिका साम्राज्यवादी रवैये पर चल रहा है: वक्ता
ऐप्सो जिला अध्यक्ष मंडली के सदस्य राजीव रंजन ने कहा कि अमेरिका आज अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के साम्राज्यवादी देशों की तरह व्यवहार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका सालाना एक ट्रिलियन डॉलर सिर्फ हथियारों पर खर्च करता है और दुनिया भर में उसके लगभग नौ सौ सैन्य अड्डे हैं। उन्होंने भारत से वेनेजुएला के समर्थन में खुलकर सामने आने की मांग की।
दुनिया को एकजुट होने की जरूरत
प्राथमिक शिक्षकों के नेता भोला पासवान ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति आज पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुके हैं।
यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका—हर जगह भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को एकजुट होकर इस खतरे का मुकाबला करना चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग
सभा को पटना जिला किसान सभा के गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता उदयन राय, दिशा छात्र संगठन के अजीत, एआईएसएफ नेता मीर सैफ अली, लेखक व शिक्षाविद अभय पांडे सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
धन्यवाद ज्ञापन इसकफ के पटना जिला अध्यक्ष आनंद शर्मा ने किया।
मार्च में पटना के अलावा खुसरूपुर, दानापुर समेत कई क्षेत्रों से लोग शामिल हुए।
प्रमुख रूप से इसकफ के पटना जिला सचिव विनय बिहारी लाल, प्रो. अरुण कुमार, शौकत अली, पंकज कुमार, अनूप कुमार, विपिन पासवान, रविशंकर पांडे, तौसीक आलम, अभिषेक विद्रोही, जयप्रकाश, गौतम गुलाल, बिट्टू भारद्वाज, आशीष बरनवाल, अनिल रजक, मनोज कुमार, अरविंद यादव, रोहित आदि उपस्थित थे।