उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के कथित बयान — “बिहार में 20–25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं” — को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इस बयान को लेकर बिहार महिला समाज ने कड़ा विरोध जताते हुए साहू पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
महिला संगठन ने इस टिप्पणी को बिहार की महिलाओं का खुला अपमान बताते हुए कहा है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सत्ता से जुड़ी सोच और महिलाओं के प्रति नजरिए पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
‘यह बयान सिर्फ व्यक्ति का नहीं, सत्ता की मानसिकता दर्शाता है’
बिहार महिला समाज की अध्यक्ष निवेदिता झा ने पटना से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि गिरधारी लाल साहू का बयान बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
उनका कहना है कि यह टिप्पणी यह दिखाती है कि महिलाओं को लेकर सत्ता के आसपास मौजूद लोगों की सोच कितनी असंवेदनशील है।
निवेदिता झा ने कहा,
“यह बयान किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सत्ताधारी कैबिनेट मंत्री के पति का है। इसे निजी सोच कहकर नहीं टाला जा सकता। यह भाजपा के महिलाओं के प्रति नजरिए को उजागर करता है।”
‘बेटी बचाओ’ के नारे और हकीकत के बीच बड़ा फासला
महिला संगठन ने सवाल उठाया कि जो पार्टी और सरकार महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों की बात करती है, वही आज इस मामले में चुप क्यों है।
निवेदिता झा ने आरोप लगाया कि बीजेपी, जदयू और एनडीए गठबंधन के किसी भी बड़े नेता की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उनका कहना है कि यह चुप्पी दिखाती है कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर पड़ जाती है, खासकर जब मामला सत्ता से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति का हो।
‘अगर आम आदमी होता, अब तक कार्रवाई हो चुकी होती’
बिहार महिला समाज ने इस पूरे मामले में दोहरा मापदंड अपनाए जाने का भी आरोप लगाया है।
संगठन का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक इस तरह का बयान देता, तो अब तक उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी होती और कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाती।
लेकिन चूंकि यह मामला सत्ताधारी दल से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति का है, इसलिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
आपराधिक मुकदमे की मांग, आंदोलन की चेतावनी
बिहार महिला समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गिरधारी लाल साहू पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो बिहार की महिलाएं सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगी।
संगठन का कहना है कि यह मामला सिर्फ बयान का नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
अब जिम्मेदारी तय होने की बारी
गिरधारी लाल साहू के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सत्ता के करीब रहने वाले लोग जब बोलते हैं, तो वह निजी राय नहीं रह जाती।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उत्तराखंड सरकार, बिहार सरकार और केंद्र सरकार इस मामले में सिर्फ औपचारिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित रहती हैं या वास्तव में कानून और नैतिकता के स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है।
कहीं ऐसा न हो कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ा यह गंभीर मामला भी राजनीतिक चुप्पी की भेंट चढ़ जाए।