बिहार NDA में सीट बंटवारा फाइनल: BJP-JDU 101-101 सीटों पर, चिराग को मिला बड़ा फायदा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में सीट बंटवारे पर आख़िरकार सहमति बन गई है। हफ्तों से चली बैठकों और अंदरूनी खींचतान के बाद बीजेपी, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम (सेकुलर) और आरएलएम के बीच फॉर्मूला तय हो गया है। इस बार बीजेपी और जदयू बराबरी के आधार पर 101-101 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेंगी।

चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, जबकि जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटें दी गई हैं। इस तरह, राजग के कुल 243 सीटों का बंटवारा सौहार्दपूर्ण वातावरण में पूरा हुआ है।


धर्मेंद्र प्रधान ने किया ऐलान

भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि “राजग के सभी घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा आपसी सहमति से तय कर लिया गया है।”
प्रधान ने दावा किया कि यह निर्णय सौहार्दपूर्ण माहौल में लिया गया और सभी सहयोगी दलों ने इसे स्वीकार किया है।

एनडीए के सूत्रों के मुताबिक, सभी दल अगले एक-दो दिनों में अपने प्रत्याशियों की सूची भी जारी कर देंगे। बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में—6 और 11 नवंबर को—किए जाएंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी।


क्यों मिली लोजपा को ज्यादा सीटें?

शुरुआत में लोजपा (रामविलास) को 22 सीटें देने की बात चल रही थी, लेकिन चिराग पासवान के रुख को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने फॉर्मूले में बदलाव किया। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने “एक सांसद पर छह विधानसभा सीट” के समीकरण के तहत यह बंटवारा किया।

इस हिसाब से, लोजपा के 5 सांसद हैं—इसीलिए पार्टी को 29 सीटें दी गईं। चिराग पासवान की मांग पर गोविंदगंज विधानसभा सीट भी उन्हें सौंप दी गई है।


मांझी और कुशवाहा को बराबर सम्मान

हम पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी तथा आरएलएम के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा—दोनों के पास फिलहाल एक-एक सांसद हैं। इसी आधार पर दोनों को छह-छह सीटें दी गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मांझी को अपनी पसंदीदा अतरी सीट मिल गई है, जहां से वे अपनी बेटी को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं।

वहीं उपेंद्र कुशवाहा को 2026 में राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद दोबारा राज्यसभा भेजने का आश्वासन भी दिया गया है।


बीजेपी-जदयू के बीच नई बराबरी

2020 के चुनाव में जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन महज़ 43 पर जीत दर्ज कर सकी थी। इस बार पार्टी का “बड़ा भाई” वाला दर्जा घट गया है और सीटें बराबर बांटी गई हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने बिहार से 17 और जदयू ने 16 सीटें जीती थीं। इस लिहाज से, बीजेपी को 101 और जदयू को 101 सीटें मिलीं — लेकिन “समान साझेदारी” के इस फ़ॉर्मूले से एनडीए में आंतरिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।


सीट स्वैपिंग का भी फॉर्मूला तैयार

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, एनडीए ने “सीट स्वैपिंग” का फॉर्मूला भी तैयार किया है, जिसके तहत कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की अदला-बदली संभव है। इसका उद्देश्य है एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर को कमजोर करना और गठबंधन की एकजुटता को दिखाना।

बिहार में एनडीए का यह सीट बंटवारा राजनीतिक रूप से कई संदेश देता है —
बीजेपी और जदयू ने बराबरी के फॉर्मूले से गठबंधन में संतुलन बनाया है, वहीं चिराग पासवान को मिले अतिरिक्त सीटें दिखाती हैं कि पार्टी अब उन्हें भी गंभीर राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर देख रही है।

अब सबकी नजर उम्मीदवारों की सूची और प्रचार रणनीति पर है — जो तय करेगी कि बिहार की सियासत में इस बार कौन बाजी मारता है।

Posted by The Azadi