बिहार की राजनीति इन दिनों इंडिया गठबंधन की साझा पहल ‘वोटर अधिकार यात्रा‘ को लेकर गरमाई हुई है। यह यात्रा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव तमाम विपक्षी नेता यात्रा के तहत जनता से संवाद कर रहे हैं। विपक्ष इसे जनता से जुड़ने का अभियान बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे महज़ चुनावी दिखावा करार दे रहा है। इसी मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र दुबे भाऊ ने द आज़ादी से विशेष बातचीत में कई अहम पहलुओं पर प्रकाश डाला।
जनता की भागीदारी और असली मुद्दे
भाऊ के अनुसार, इस यात्रा में जनता की गहरी भागीदारी दिख रही है।
- बेरोज़गारी, पलायन, महँगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सवाल जनता के केंद्र में हैं।
- लोग चाहते हैं कि राजनीतिक दल सिर्फ वादे न करें, बल्कि सीधे जनता के बीच आकर उनके मुद्दे सुनें।
- भाऊ ने कहा, “जनता को भरोसा चाहिए कि उनकी आवाज़ सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित न रह जाए।”
राहुल गांधी का बदला हुआ अंदाज़
भाऊ का मानना है कि राहुल गांधी इस यात्रा के दौरान पहले से ज़्यादा आक्रामक और आत्मविश्वासी दिख रहे हैं।
- उनकी भाषा अब सरल और सीधे तौर पर जनता से जुड़ती है।
- वे सत्ता से कठिन सवाल पूछ रहे हैं और सरकार की जवाबदेही पर ज़ोर दे रहे हैं।
- भाऊ ने कहा, “राहुल गांधी अब जनता के बीच संवाद को राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि ज़रूरत मानकर कर रहे हैं।”
तेजस्वी यादव की भूमिका
तेजस्वी यादव पर बात करते हुए भाऊ ने कहा कि बिहार की राजनीति में उनकी छवि युवाओं से जुड़ी है।
- वे लगातार नौकरी और रोजगार पर फोकस कर रहे हैं।
- तेजस्वी और राहुल गांधी की जोड़ी विपक्ष के लिए नई ताक़त के तौर पर उभर रही है।
- लेकिन भाऊ ने आगाह किया कि गठबंधन में स्थिरता और भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
विपक्ष की रणनीति
भाऊ के मुताबिक विपक्ष इस यात्रा को जनता के असंतोष को संगठित करने का मौका मान रहा है।
- विपक्ष की कोशिश है कि इस यात्रा के जरिए भाजपा और जदयू के खिलाफ राजनीतिक माहौल तैयार किया जाए।
- राहुल-तेजस्वी की साझा मौजूदगी विपक्ष की एकता का संदेश देती है।
- भाऊ ने कहा, “अगर यह एकजुटता बनी रही तो बिहार में सियासी समीकरण बदल सकते हैं।”
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
सत्ता पक्ष इस यात्रा को हल्के में लेने की कोशिश कर रहा है।
- भाजपा और जदयू नेता इसे चुनावी ड्रामा बताते हैं।
- लेकिन भीड़ और जनता की मौजूदगी से साफ है कि इस यात्रा को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा।
- भाऊ ने कहा कि सत्ता पक्ष को इस यात्रा से निकलने वाले संदेश को गंभीरता से लेना चाहिए।
मीडिया की भूमिका
भाऊ ने कहा कि मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- मुख्यधारा का मीडिया अधिकतर सत्ता पक्ष का नैरेटिव आगे बढ़ा रहा है।
- जबकि सोशल मीडिया और वैकल्पिक मंचों पर यात्रा को लेकर चर्चा तेज़ है।
- स्वतंत्र और क्षेत्रीय मीडिया जनता तक असली संदेश पहुँचाने में अहम साबित हो रहा है।
भविष्य का संकेत
भाऊ ने बातचीत के अंत में कहा कि यह यात्रा विपक्ष के लिए एक turning point हो सकती है।
- अगर विपक्ष जनता के मुद्दों पर टिके रहे और भरोसा कायम रखे तो इसका असर बिहार की राजनीति पर दूरगामी होगा।
- भाऊ ने कहा, “चुनौती यह है कि इस ऊर्जा और जनता की उम्मीदों को चुनाव तक ज़िंदा रखा जाए।”
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा ने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। जनता की बड़ी भागीदारी ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर मुद्दों पर आधारित आंदोलन का रूप दे दिया है। अब देखना होगा कि विपक्ष इस यात्रा से मिले संदेश को किस तरह राजनीतिक परिणामों में बदल पाता है।
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