News

चंपारण के गाँधी आश्रम से करेंगे शिक्षक चौथे चरण के आंदोलन का आगाज़, प्रदेश में चलाएंगे जन जागरण व हस्ताक्षर अभियान

  • अध्यापक नियमावली 2023 के विरोध में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा चौथे चरण के सत्याग्रह का आगाज़
  • शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है सरकार : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ
  • जयप्रकाश की लहरों पर सवार हो कर सत्ताशीन शासक लोकतंत्र की घोंट रहे हैं गला : शत्रुघ्न प्रसाद सिंह
  • शिक्षक पहुँचेंगे 10 जून को गांधी आश्रम, भितिहरवा(चंपारण) बिना शर्त राज्यकर्मी की मांग को लेकर करेंगे आंदोलन की शुरुआत

पटना: अध्यापक नियमावली 2023 के विरोध में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने आंदोलन के चौथे चरण के कार्यक्रमों की घोषणा की है। ज्ञातव्य है कि बीते 1 मई से ही नियोजित शिक्षकों को बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर पूरे बिहार में 3 जून तक शिक्षकों का आंदोलन लगातार जारी रहा। जिला एवं प्रमंडल मुख्यालयों पर प्रदर्शन के बाद बीते 22 मई से 3 मई तक बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर रोजाना सत्याग्रह चलता रहा। अब शिक्षक संघ ने चौथे चरण के आंदोलन के तहत जन जागरण और हस्ताक्षर अभियान चलाने की घोषणा की है।

माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह द्वारा शिक्षकों से लाइव संवाद का वीडियो देखें

वीडियो देखे:

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव सह पूर्व सांसद श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने एक प्रेस बयान देकर कहा है कि बिहार सरकार द्वारा विगत डेढ़ दशक से भी अधिक समय से लाखों शिक्षकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। इसलिए भारी संख्या में बिहार के प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक तक के शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं शारीरिक शिक्षक 10 जून, 2023 को महात्मा गाँधी की कर्मभूमि और तपोभूमि चंपारण के भितिहरवा आश्रम पहुँच कर राष्ट्रपिता की प्रतिमा के समक्ष शिक्षकों के बदस्तूर शोषण को खत्म करने के लिए संकल्प लेने हेतु एकजुट होंगे। उन्हौने कहा इसी दिन से प्रदेश के शिक्षक सरकार द्वारा लायी गयी नई अध्यापक नियमावली के विरुद्ध जनजागरण अभियान की शुरुआत करेंगे।

श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि 10 जून हमें ऐतिहासिक तिथि 10 जून 1917 की याद दिलाती है। चम्पारण के शोषित किसानों के मुक्ति यज्ञ में अपने आप को होम करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भितिहरवा पहुँचे थे। उस समय तक ब्रितानिया हुकूमत किसानों की समस्या की वार्ता को ठुकरा रही थी। लेकिन चम्पारण सत्याग्रह के मुहिम ने हुकूमत को वार्ता के लिए विवश किया। परिणामस्वरूप 10 जून, 1917 को ही बिहार एवं उड़ीसा की तत्कालीन सरकार ने वार्ता के लिए अधिसूचना अधिसूचित की

श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि आजाद भारत में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्णक्रांति की लहर पर सवार हो कर जो लोग संवैधानिक पदों को सुशोभित कर रहे हैं, उन्ही की सरकार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। अभी तक पुस्तकालयाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षक एवं शारीरिक शिक्षा-स्वास्थ्य अनुदेश के पदों पर भी कोई विचार नहीं किया जा रहा है। यह दुर्भाग्य की बात है। राज्य के लाखों शिक्षकों के संगठन बार-बार सरकार से अनुरोध कर रहे हैं जिसको ठुकराना असंवैधानिक है। ग्रीष्मावकाश का उपयोग जनजागरण अभियान के माध्यम से शिक्षक हर कीमत पर चलाते रहेंगे और आम जन एवं जनप्रतिनिधियों से हस्ताक्षर अभियान जारी रहेगा।

Related Articles

Back to top button