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शिक्षकों का संघर्ष सरकार की सेहत के लिए हितकारी नहीं : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ।

शिक्षकों की हकमारी सरकार के लिए हितकर नहीं है, सरकार के रवैये ने शिक्षक समुदाय को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। आगे राजधानी पटना घेरेंगे चार लाख शिक्षक : शत्रुघ्न प्रसाद सिंह

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा अध्यापक नियमावली 2023 के विरुद्ध पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर आहूत सत्याग्रह व धरना दसवें दिन भी शांतिपूर्वक जारी रहा। इसको लेकर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव सह पूर्व सांसद श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि शिक्षकों को सड़कों पर संघर्ष करने के लिए विवश करना सरकार की सेहत के लिए हितकर नहीं होगा।

शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह के साथ बातचीत का वीडियो देखें

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श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि हमने सरकार से नई अध्यापक नियमावली में संशोधन हेतु संघ के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता करने के लिए बार-बार अनुरोध किया है लेकिन सरकार ने इस दिशा में अबतक संवेदनशीलता नहीं दिखलाई है। हमारी आवाज को अधिक दिनों तक अनसुनी नहीं की जा सकती। सरकार के इस रवैये ने हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।

श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि हमने आज भी मुख्यमंत्री को आगाह किया है कि अगर सरकार शिक्षकों की मांगे नहीं मानती है तो हम इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जायेंगे और अपने पक्ष में जनसमर्थन हासिल करेंगे और विधानमंडल के सत्र के दौरान चार लाख शिक्षकों को लेकर राजधानी पटना में हम घेरा डालेंगे, डेरा डालेंगे।

आगे शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि आयोग द्वारा निर्गत आत्मघाती आवेदन को नियोजित शिक्षक नहीं भरेंगे। पूर्व से नियुक्त नियोजित शिक्षकों को परीक्षा में शामिल करने से वरीयता खोकर नयी नियुक्ति होगी। उन्हें सेवानिवृत्ति तक प्रोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। वे प्राप्त कर रहे वेतनादि से कम वेतन पर परीक्षा देकर आत्मघाती कदम नहीं उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विज्ञापन में पुस्तकालयाध्यक्ष और शारीरिक शिक्षक, अनुदेशक पदों की चर्चा नहीं है। राज्यकर्मी के नाम पर न केवल नियोजित शिक्षकों के साथ बल्कि राज्य के लाखों नौजवानों के साथ धोखाधड़ी है। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ लड़कर अपना अधिकार लेगा।

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