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शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद शिक्षकों पर कार्रवाई वैधानिक नहीं : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ

आंदोलनकारी शिक्षकों पर कार्रवाई से विधान मंडल की होगी अवमानना : शत्रुघ्न प्रसाद सिंह

पटना: शिक्षकों को बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा देने की माँग को लेकर विगत 11 जुलाई को बिहार विधान मंडल के समक्ष शिक्षकों के प्रदर्शन करने के मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से शिक्षकों के विरुद्ध लिखित और मौखिक आदेश दिये जा रहे हैं। इसे लेकर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह एवं महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने आज एक बयान जारी कर कहा है कि 11 जुलाई, 2023 को जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा हमें शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति प्राप्त थी। हमने उसका शत-प्रतिशत अनुपालन किया है। इसके बावजूद कतिपय शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन से शिक्षकों पर विधि व्यवस्था बाधित करने की जवाबदेही बगैर किसी आधार और प्रमाण के सौंपी जा रही है जो अत्यंत खेदजनक है।

शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी, पटना और वरीय पुलिस पदाधिकारी तथा गर्दनीबाग थानाध्यक्ष ने इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की है कि शिक्षकों का प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण और अनुशासित था। इसके बावजूद मनमाने ढंग से शिक्षकों पर आरोप लगाने वाले पदाधिकारियों के लिखित स्पष्टीकरण से शिक्षकों में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है। ऐसे में विद्यालयों में पठन-पाठन के माहौल को बिगाड़ने की जवाबदेही विभाग की ही होगी।

आंदोलनकारी शिक्षकों पर अनर्गल आरोपों से बाज आयें अधिकारी : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ

शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि ऐसे अर्नगल आरोपों से विभागीय पदाधिकारियों को बाज आना चाहिए। कतिपय पदाधिकारियों ने नियमावली में निर्दिष्ट आचार संहिता का भी अप्रसांगिक एवं अनावश्यक रूप से उल्लंघन का आरोप लगाया है।

उन्हें फिर से नियमावली का अवलोकन करना चाहिए। उसमें शिक्षकों को अधिकृत अवकाश लेकर अपनी सेवाशर्तों में सरकार द्वारा की जा रही हकमारी के खिलाफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का अधिकार है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदत्त किसी भी संघ-संगठन का यह मौलिक अधिकार है। इसके विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई करना मौलिक अधिकार का हनन करने का अपराध है। यह आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है।

शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि ऐसे आदेशों को विभागीय पदाधिकारियों को ससम्मान वापस कर लेना चाहिए। सरकार ने जब हमारे आन्दोलन के कारण वार्ता करने की सदिच्छा विधान मंडल में जाहिर की है तो इसके प्रतिकूल विभाग का आचरण विधान मंडल की अवमानना मानी जायेगी। इसलिए इन तमाम अप्रमाणिक अवैधानिक एवं संविधान विरोधी लिखित तथा वेतन रोकने के मौखिक आदेश को भी तात्कालिक प्रभाव से वापस कर लेना चाहिए। किसी कारणवश कर्मचारी का वेतन रोकना मानवाधिकार का उल्लंघन माना जायेगा और यह संविधान में प्रदत्त मानवीय गरिमा के भी प्रतिकूल सिद्ध होगा।

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